
तटबंध नहीं, जीवन चाहिए” : बागमती पर निर्माण के खिलाफ उग्र हुआ आंदोलन, अनशन शुरू
गायघाट (मुजफ्फरपुर)।
बागमती नदी पर प्रस्तावित तटबंध निर्माण के खिलाफ क्षेत्र में आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया है। “चास-वास-जीवन बचाओ बागमती संघर्ष मोर्चा” के नेतृत्व में 16 फरवरी से केवटसा चौक, बेनीबाद में सामूहिक अनशन शुरू हो गया। ग्रामीणों ने साफ कहा है—“रिव्यू कमिटी की रिपोर्ट आए बिना एक इंच भी निर्माण नहीं होने देंगे।”
आंदोलनकारियों का आरोप है कि वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने जनदबाव के बाद नदी विशेषज्ञों की रिव्यू कमिटी गठित कर रिपोर्ट आने तक तटबंध निर्माण रोकने की घोषणा की थी। कमिटी में दिनेश मिश्र, डॉ. राजीव सिन्हा, अनिल प्रकाश समेत कई विशेषज्ञ शामिल थे। लेकिन आठ साल बीतने के बाद भी कमिटी निष्क्रिय पड़ी है, जबकि प्रशासन पुलिस बल के सहारे निर्माण कार्य शुरू करा रहा है और विरोध करने वालों पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।
अनशन स्थल पर जुटे किसानों ने कहा कि तटबंध बनने से हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन डूब क्षेत्र में चली जाएगी, गांव उजड़ेंगे और पशुधन पर संकट आएगा। “बाढ़ नियंत्रण के नाम पर यह हमारे अस्तित्व पर हमला है,” आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया।
हाल ही में पूर्वी अनुमंडलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर काम पर रोक की मांग की गई, परंतु कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में आक्रोश है।
मोर्चा ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने निर्माण कार्य पर तत्काल रोक नहीं लगाई और रिव्यू कमिटी को सक्रिय नहीं किया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अनशन स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है—“यह लड़ाई सिर्फ तटबंध की नहीं, खेती-बाड़ी, घर और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है।”बैठक की अध्यक्षता वैद्यनाथ मिश्र ने की और संचालन जितेंद्र यादव ने किया। बाढ़ मुक्ति अभियान के उमेश राय, मुखिया प्रतिनिधि रंजीत कुमार सिंह, प्रगतिशील किसान मोर्चा के पप्पू सिंह, मुनाजिर हसन, राम सजन राय, राहुल कुमार, नंदकिशोर ठाकुर, सुनील यादव व राधा देवी ने संबोधित किया। मंच पर मोर्चा अध्यक्ष ठाकुर देवेंद्र सहित कई ग्रामीण प्रतिनिधि मौजूद थे।