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देहरादून की सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब, कानून-व्यवस्था पर सरकार को कठघरे में खड़ा करती कांग्रेस

देहरादून की सड़कों पर उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई जब कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के नेतृत्व में हजारों कार्यकर्ता राजभवन कूच के लिए उतर पड़े। परेड ग्राउंड में आयोजित सभा के बाद यह कूच निकाला गया, जिसमें राज्य की बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर धामी सरकार पर तीखा हमला बोला गया।

सभा में वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, महिला उत्पीड़न की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं, बेरोजगारी चरम पर है और जंगली जानवरों का आतंक ग्रामीण क्षेत्रों में आमजन की जान पर बन आया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सरकार इन मुद्दों पर ठोस कार्रवाई करने में विफल रही है और कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है।

हालिया 15–16 दिनों में हुए पांच हत्याकांडों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। नेताओं ने इन मामलों में पुलिस की कार्यप्रणाली और अपराध रोकने में असफलता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि लगातार हो रही हत्याओं ने आम नागरिकों में भय का माहौल पैदा कर दिया है और अपराधियों में कानून का डर समाप्त होता दिखाई दे रहा है।

विशेष रूप से बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड का जिक्र करते हुए नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार प्रभावशाली लोगों को बचाने में ज्यादा सक्रिय दिखी, जबकि पीड़ित परिवार आज भी न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है। इस मामले को कांग्रेस ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था की सबसे बड़ी विफलता बताया।

कांग्रेस नेता प्रीतम सिंह ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विपक्ष की आवाज से डरी हुई है। उन्होंने कहा कि राजभवन कूच के प्रचार के लिए लगाए गए पोस्टर और बैनर नगर निगम कर्मचारियों से हटवाए गए, जो सरकार की असहिष्णुता और लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन को दर्शाता है। प्रीतम सिंह ने इसे सरकार की हताशा करार देते हुए कहा कि जनता अब जवाब मांग रही है।

कांग्रेस नेताओं का दावा है कि राज्य में शासन-प्रशासन का नियंत्रण कमजोर पड़ चुका है और अपराधियों में कानून का भय समाप्त हो गया है। उनका कहना है कि यदि सरकार समय रहते स्थिति नहीं संभालती, तो जनता सड़क से सदन तक जवाबदेही तय करेगी।

यह प्रदर्शन स्पष्ट संकेत देता है कि कानून-व्यवस्था का मुद्दा अब राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर जनाक्रोश का रूप ले चुका है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इन गंभीर आरोपों का जवाब ठोस कार्रवाई से देगी या इसे भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखेगी।

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