logo

रायगढ़ पुलिस लाइन की खबर

• जितने आवास हैं उसमें भी आधे से ज्यादा कंडम, कोई भी नया प्रोजेक्ट लाने की सोच तक नहीं
रायगढ़। बेहद अजीब बात है कि जो पुलिसकर्मी आम जनता की सुरक्षा करते हैं, उनके परिवार को आवास की सुरक्षा नहीं मिल पाती है। नाममात्र के जो आवास विभाग के पास हैं, उनमें भी आधे से अधिक कंडम पड़े हुए हैं। किसी ने भी सरकार से पुलिस हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए मांग नहीं की। रायगढ़ पुराना स्थापित जिला है। औद्योगीकरण के बाद रायगढ़ का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ चुका है। दीगर राज्यों से एक बड़ी जनसंख्या हर साल रायगढ़ में कदम रखती है। सुरक्षा के लिहाज से भी रायगढ़ को अपग्रेड होना है। जो अमला आम आदमी की सुरक्षा में तैनात है, उसके लिए भी उतनी ही सुविधाएं होनी चाहिए। हैरानी की बात है कि इतना पुरना जिला होने के बावजूद अब तक किसी भी एसपी ने यहां के पुलिसकर्मियों के लिए हाउसिंग प्रोजेक्ट के बारे में नहीं सोचा।











जिले में एडिशनल एसपी, डीएसपी, टीआई, एसआई, प्रधान आरक्षक, आरक्षक आदि मिलाकर 1258 पद स्वीकृत हैं। इसमें से जिले में 986 उपलब्ध हैँ और 274 खाली हैं। मतलब 986 पुलिसकर्मियों के लिए आवास की सुविधा होनी भी अनिवार्य है। अब उपलब्ध आवासों की बात करें तो पुलिस लाइन उर्दना, पुराना पुलिस लाइन व अन्य मिलाकर 528 आवास हैं। इसमें से 294 कंडम हो चुके हैं। मतलब यहां कोई नहीं रह सकता। बचे हुए 234 आवासों में करीब 1000 पुलिसकर्मियों को रहना है। अगर आधे पुलिसकर्मियों को भी आवास देना चाहें तो भी उपलब्ध नहीं है। इसकी वजह यह है कि पिछले 20 सालों में पुलिस अमला बढऩे के बावजूद कोई आवासीय परिसर निर्माण करने की पहल नहीं की गई। जबकि इतने सालों सामान्य प्रशासन विभाग ने कई जगहों पर आवासीय परिसर विकसित कर लिए।

0
211 views