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सुप्रीम कोर्ट में असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ एफआईआर व एसआईटी जांच की मांग पर अहम सुनवाई आज


सुप्रीम कोर्ट आज असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ दायर उन याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई करेगा, जिनमें कथित घृणा भाषण (हेट स्पीच) से जुड़े आरोपों को लेकर एफआईआर दर्ज करने तथा स्वतंत्र विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि संबंधित बयानों की प्रकृति गंभीर है और इनकी निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए राज्य पुलिस के बजाय एक स्वतंत्र एजेंसी या एसआईटी द्वारा जांच कराई जानी चाहिए। याचिकाओं में यह भी आग्रह किया गया है कि अदालत इस मामले में कानून के प्रावधानों के तहत आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करे, ताकि निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष होगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह सुनवाई केवल एक व्यक्तिगत मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस व्यापक प्रश्न से भी जुड़ी है कि सार्वजनिक पदों पर आसीन व्यक्तियों के कथित बयानों पर कानून किस प्रकार और किन मानकों के तहत कार्रवाई करता है। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह भी प्रश्न उठ सकता है कि क्या प्रथम दृष्टया एफआईआर दर्ज करने योग्य सामग्री मौजूद है, और क्या अदालत सीधे एसआईटी गठन का निर्देश दे सकती है या पहले संबंधित प्राधिकरणों को विचार करने का अवसर दिया जाएगा।राजनीतिक दृष्टि से भी यह मामला संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि असम में आगामी चुनावी परिदृश्य के बीच यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है। अदालत की कार्यवाही और उसके बाद आने वाला आदेश राज्य की राजनीति और कानूनी विमर्श दोनों पर प्रभाव डाल सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। आगे की दिशा और संभावित आदेश का इंतजार किया जा रहा है।

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