
*महाशिवरात्रि पर निकली भव्य शिवबारात में शिव की भक्ति एवं सेवा संकल्प से माँ एकवीरा सेवक संस्था बदनावर "एक प्रयास" ने सभी को प्रसादी से तृप्त किया ।*
*बदनावर-धार : राजू गजभिये (सीताराम) AIMA (Social Media Activist)*
*महाशिवरात्रि पर निकली भव्य शिवबारात में शिव की भक्ति एवं सेवा संकल्प से माँ एकवीरा सेवक संस्था बदनावर "एक प्रयास" ने सभी को प्रसादी से तृप्त किया ।*
बदनावर -
ऐतिहासिक शिवबारात मे सभी शिव भक्त मण्डल एवं सामाजिक सेवा संस्थाओं के साथ पर्यावरण एवं स्वच्छता में नि:स्वार्थ भावनाओं से सेवा कार्य कर महाशिवरात्रि पर निकली भव्य शिवबारात में शिव की भक्ति एवं सेवा संकल्प से माँ एकवीरा सेवक संस्था बदनावर "एक प्रयास" ने सभी को *दूग्ध कोल्ड्रिंग मैंगो फ्लेवर पांच क्विंटल * प्रसादी से तृप्त किया । इस भक्ति , सेवा भाव एवं उमंग , उत्साह से बारातियों का स्वागत , प्रसादी कार्य में एन. एस. गोयल , उमा शंकर शर्मा , हरिष गुर्जर , हरि ओम सिंह चौहान , पवन जायसवाल , राजू गजभिये , राजेश सोलंकी , राहुल राम बना , जितेन्द गौर , रवि नाहर , पंकज धबाई , दीपक सोलंकी , अमित पांचाल , शुभम शर्मा एवं बच्चों में देवराज सिंह , हदयराज सिंह , माधव सोलंकी , भव्यराज धबाई आदि ने सेवा संकल्प से उत्कृष्ठ व सराहनीय कार्य किया ।
इस अवसर पर बदनावर में आज धुमधाम से निकली ऐतिहासिक शिवबारात, खूब झूमे बाराती ।
नगर समेत अंचल में आज महाशिवरात्रि श्रदा एवं आस्था के साथ धुमधाम से मनाई गईं। क्षेत्र के सबसे बड़े व पुराने परमारकालीन प्राचीन श्री बैजनाथ महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। श्री बैजनाथ भक्त मंडल की ओर से भगवान शिव को 31 हजार मावा-मिश्री लड्डुओं का भोग लगाकर प्रसादी बांटी गई। शिवलिंग का विशेष श्रृंगार भी किया गया।
बैजनाथ महादेव मंदिर में सुबह से ही श्रदालुओ का आना शुरू हो गया था। सुरक्षा की दृष्टि से बांस की बल्लियों से महिला व पुरुषों के लिए अलग अगल दर्शन व्यवस्था की गई थी। यहां दर्शनार्थियों की लंबी कतारें लगी रही। यह मन्दिर श्रदालुओ की आस्था का प्रमुख केंद्र है। ऐसी मान्यता है कि पूर्व काल में कोई तपस्वी अपने तपोबल से इस मंदिर को उड़ाकर ले जा रहे थे, लेकिन सूर्योदय का समय होते ही उन्हें यहां स्थापित करना पड़ा. उड़िया शैली में बने होने के कारण इसे उड़निया मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. मंदिर के नाम से नगर पंचायत हर साल मेले का आयोजन करती है. शिवरात्रि, श्रावण मास के अलावा भी बड़ी संख्या में यहां दर्शनार्थियों का जमावड़ा रहता है। माना जाता है कि इस मंदिर में सभी की मनोकमनाएं पूरी होती हैं. शिव जी के अभिषेक और मनोवांछित फल के लिए भक्त उत्सुक रहते हैं। बारह माह यहां भक्तों का आना जाना लगा रहता है। सावन में तो यहां श्रद्धालुओं की कतार लगी रहती है। यह मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है। यह मंदिर 1984 से पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। 64 फीट ऊंचाई का यह मंदिर जितना बाहर से मनमोहक है, उतना ही अंदर भी भव्य और मनमोहक है। मंदिर परिसर में कई पुरानी शिलालेख विराजित हैं। जनसहयोग से यहां अन्य निर्माण कार्य किए गए।
नगर के अन्य शिवालयों में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। हेमेश्वर महादेव, पातालेश्वर महादेव, आनंदेश्वर महादेव, सोमेश्वर महादेव और प्राचीन नागेश्वरधाम में श्रद्धालुओ ने दर्शन किए। सोमेश्वर चौराहे पर श्रद्धालुओं को फलाहारी खिचड़ी का वितरण सोमेश्वर भक्त मण्डल की ओर से किया गया।
शाम को महाकाल मंडल के तत्वावधान में शिवजी की बारात धूमधाम से निकाली गई। बैजनाथ महादेव मंदिर से पूजा-अर्चना के बाद शिवबारात प्रारंभ हुई। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यात्रा के साथ दो बैंड, नृत्य दल और अन्य कलाकारों ने नृत्य की प्रस्तुतियां दी है। बारात में सबसे आगे तोप चली। जिसके बाद डीजे पर श्रद्धालु भक्तिमय धुनों पर नाचते हुए निकले। बारात में दो डीजे, दो बैंड पार्टियां, देवास की शिव बारात पार्टी, बड़नगर से श्रीनाथ जी और कृष्ण भगवान के रथ, गोरिल्ला, भालू, 20 ढोल, दो तोप, दो झांकियां और नासिक के ढोल के साथ ही शिवजी व उनके गण आकर्षक वेषभूषा में सज धजकर आए। अंत में सुसज्जित रथ में दूल्हा बने शिवजी की प्रतिमा विराजित थी। ढोल की थाप पर महिलाएं और युवतियां डीजे की धुन पर थिरकतीं हुए बढ़ रही थी।
यात्रा का नगर में जगह जगह विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। श्रदालुओ को कलाकंद, फरियाली खिचड़ी, लस्सी, पानी, बोर, मिठाई आदि वितरित की गई।नगर भृमण के पश्चात बारात पिपलेश्वर मंदिर पहुंची। जहां आरती के साथ समापन हुआ। इसके पश्चात भगवान शिव व पार्वती का विधि विधान से विवाह हुआ।