होली दहन को पौराणिक परंपराओं के अनुसार पुनर्जीवित कर, जीवन में नई ऊर्जा प्राप्त करें*
होली के बड़कुले (बड़कुल्ले) गाय के गोबर से बनाए जाने वाले पारंपरिक छोटे-छोटे उपले हैं, देसी गाय के गोबर के बने हो तो और उत्तम है, धूप में 5/6 दिन में ये सुख जाते है, और फिर इनकी माला बनाकर होलिका दहन के पूजन के समय इस्तेमाल किया जाता है।
*बडकूलै बनाते समय सावधानियां*
इन्हें प्लास्टिक, धातु या बाँस की रस्सी में न पिरोएँ।
माला बनाने के लिए कलावा (मौली) का प्रयोग करना श्रेष्ठ माना गया है।
*बडकल्लो के पीछे पौराणिक मान्यता* पौराणिक मान्यता के अनुसार जब गाय के गोबर के तैयार बडकुंले घर में 5/6 दिन रहते हैं, धूप में घर में ये सूखते हैं, तो ये घर की सारी नेगेटिव एनर्जी को ऑब्जर्व कर लेते है, घर के सदस्य अपने हाथों से जब स्पर्श करते हैं, अपने माथे से लगाते हैं तो गाय के गोबर से बने गडकुले, व्यक्ति की सारी नेगेटिव एनर्जी ,नजर दोष को ग्रहण कर लेते हैं, और होलिका दहन में जलने पर समस्त दोष जलकर भस्म हो जाता हैं
*अवतोष शर्मा आध्यात्मिक लेखक*
शेष अगले अंक में