दो मुट्ठी चावल, एक नन्हा बच्चा, तीन महीने बाद आंगनवाड़ी सेंटर में चूल्हा जला
कालाहांडी (चितरंजन बिस्सी) आंगनवाड़ी सेंटर में तीन महीने से चूल्हा नहीं जला है। जबकि सेंटर बिस्किट और अंडे देकर चलाए जा रहे हैं, ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्टर ने इस बारे में मुंह नहीं खोला है। इस बारे में चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर या डिपार्टमेंट के अधिकारी चुप हैं। गौरतलब है कि कालाहांडी जिले में 2363 आंगनवाड़ी सेंटर हैं, और यहां करीब 80 हजार बेनिफिशियरी हैं जो पका हुआ खाना खाते हैं। उनके लिए हर महीने 3 हजार से 5 हजार कृंतक चावल उठाकर जिले के अलग-अलग ब्लॉक के आंगनवाड़ी सेंटर में सप्लाई किया जाता है। उस हिसाब से हर साल चार किश्तों में एवरेज 20 हजार कृंतक चावल उठाकर सेंटर में सप्लाई किया जाता है। जिले के बाहर के एक ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्टर ने इसे मैनेज करने की जिम्मेदारी ली है। कॉन्ट्रैक्टर ने चावल उठाने के लिए दूसरे आदमी को रखा है। डिस्ट्रिक्ट सोशल वेलफेयर ऑफिसर के ऑफिस के लेटर नंबर RWB 175 से संबंधित कॉन्ट्रैक्टर को चावल उठाने का ऑर्डर जारी किया गया। DSW के लेटर के आधार पर अलग-अलग चावल गोदामों से चावल उठाया गया है। नवंबर के आखिर तक धर्मगढ़-गंबरीगुड़ा के सेंट्रल वेयरहाउस से 600 क्रिंटल चावल उठाया गया है, जबकि नवंबर में कोकसरा के सेंट्रल वेयरहाउस से 270 क्रिंटल चावल उठाया गया है। धर्मगढ़ और कोकसरा से चावल उठाए 3 महीने बीत चुके हैं, लेकिन धर्मगढ़ के तारापुर आंगनवाड़ी सेंटर को छोड़कर किसी भी सेंटर पर चावल नहीं पहुंचा है। कुछ सेंटरों में पिछला बकाया लेकर पका हुआ खाना बनाया जा रहा है। कुछ सेंटरों में उपमा और अंडे देकर काम चलाया जा रहा है। इन सब गड़बड़ियों के बावजूद किसी आंगनवाड़ी वर्कर ने यह कहने के लिए मुंह नहीं खोला कि ऑफिसर ने मना किया है। इस बारे में पूछे जाने पर धर्मगढ़ CDPO धारित्री मंजरी पानीग्रही ने यह कहते हुए मना कर दिया कि यह ऑफिशियल सीक्रेट है।
इस बारे में पूछे जाने पर घटना की जांच कर रही धर्मगढ़ सब-डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट प्रेक्षा अग्रवाल ने कहा कि डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पास सारी रिपोर्ट हैं। एक दशक पहले भी ऐसी ही एक घटना में डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन के कहने पर पुलिस ने केस दर्ज करके घटना में शामिल लोगों को जेल भेज दिया था। इतनी बड़ी घटना में डिपार्टमेंट का कोई एक्शन न लेना शक पैदा करने वाली बात है।