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बागमती पर तटबंध निर्माण के खिलाफ फिर भड़का आंदोलन, 16 फरवरी से बेनीबाद में अनिश्चितकालीन सामूहिक अनशन

मुजफ्फरपुर। बागमती नदी पर प्रस्तावित तटबंध निर्माण को ‘विनाशकारी’ बताते हुए चास-वास-जीवन बचाओ बागमती संघर्ष मोर्चा ने 16 फरवरी से बेनीबाद में पुनः अनिश्चितकालीन सामूहिक अनशन शुरू करने की घोषणा की है। इसकी तैयारी को लेकर शुक्रवार को गायघाट प्रखंड के विभिन्न गांव-पंचायतों में व्यापक प्रचार अभियान और नुक्कड़ सभाओं का आयोजन किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए मोर्चा के नेता जितेन्द्र यादव ने कहा कि पिछले कई दशकों से बागमती पर तटबंध निर्माण के खिलाफ सत्याग्रह, आमरण अनशन, जनमार्च, चक्का जाम, धरना-प्रदर्शन, विधानसभा मार्च और पटना में नदी विशेषज्ञों के सम्मेलनों के माध्यम से आंदोलन चलता रहा है। हजारों लोगों की भागीदारी से यह संघर्ष जनआंदोलन का रूप ले चुका है।
उन्होंने कहा कि जनदबाव और विशेषज्ञों की सलाह पर 2017 में नीतीश कुमार की सरकार ने नदी विशेषज्ञों और अभियंताओं की एक रिव्यू कमिटी गठित की थी और स्पष्ट घोषणा की थी कि कमिटी की रिपोर्ट आने तक तटबंध निर्माण कार्य स्थगित रहेगा।
रिव्यू कमिटी में प्रसिद्ध नदी विशेषज्ञ दिनेश मिश्र, आईआईटी कानपुर के भू-विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव सिन्हा, गंगा बाढ़ नियंत्रण सेवा आयोग के पूर्व निदेशक सच्चिदानंद तिवारी, एल.पी. सिन्हा, गंगा मुक्ति आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक अनिल प्रकाश, असैनिक अभियंत्रण विभाग के ओमप्रकाश तथा एमआईटी पटना के डॉ. रामाकार झा शामिल थे। कमिटी की अध्यक्षता सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता उमाशंकर सिंह को सौंपी गई थी।
मोर्चा का आरोप है कि आठ वर्ष बीत जाने के बावजूद सरकार ने कमिटी को न तो पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए और न ही स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। इसके विपरीत बीच-बीच में पुलिस बल की तैनाती कर जबरन तटबंध निर्माण कार्य शुरू कराया जाता है तथा आंदोलनकारियों पर मुकदमे दर्ज किए जाते हैं।
हाल ही में निर्माण कार्य दोबारा शुरू होने के विरोध में एक प्रतिनिधिमंडल ने अनुमंडलाधिकारी (पूर्वी) से मिलकर काम पर तत्काल रोक लगाने की मांग की और ज्ञापन सौंपा।
मोर्चा के संरक्षक देवेन्द्र ठाकुर ने घोषणा की कि 16 फरवरी 2026 से बेनीबाद में सामूहिक अनशन शुरू होगा। उन्होंने मांग की कि रिव्यू कमिटी को सक्रिय कर बागमती क्षेत्र की जनता से व्यापक विचार-विमर्श कराया जाए और उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही आगे कोई निर्णय लिया जाए। जब तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती, तब तक निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए।
सभा को राम सज्जन राय, राजा हुसैन, सुरेश राम, सीताराम राय, राजकिशोर राय, विवेक कुमार, गुड्डू कुमार, अशोक कुमार एवं रामप्रवेश राय ने भी संबोधित किया और गांव-गांव से बड़ी संख्या में अनशन स्थल पर पहुंचकर आंदोलन को मजबूत करने की अपील की।
बेनीबाद, तुर्कटोलिया, गोदाम, मिश्रौली, हरखौली, चंदौली, बलुआ, बर्री, भवानीपुर और नवादा सहित कई स्थानों पर नुक्कड़ सभाएं आयोजित की गईं। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई केवल तटबंध के खिलाफ नहीं, बल्कि “चास-वास-जीवन” की रक्षा के लिए है।

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