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चित्रकूट: 10 साल से अधूरा 'खोह' ओवरब्रिज बना हादसों का सबब, राहगीरों की जान पर मंडराया खतरा।

चित्रकूट। जिले के खोह रेलवे क्रॉसिंग पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज पिछले एक दशक से अपनी पूर्णता की राह देख रहा है। सरकारी सुस्ती, गलत डिजाइन और भूमि अधिग्रहण के पेंच में फंसा यह प्रोजेक्ट अब आम जनता के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं रह गया है। अधूरा ढांचा न केवल यातायात में बाधा डाल रहा है, बल्कि यहां हर वक्त किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।
दशक भर का इंतज़ार: वर्ष 2015 में शुरू हुआ यह निर्माण 2026 में भी पूरा नहीं हो सका है। 22 करोड़ की लागत से शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट अब 31 करोड़ के पार पहुंच चुका है।
जाम और दुर्घटनाएं: झांसी-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित इस क्रॉसिंग के बार-बार बंद होने से एंबुलेंस और स्कूली वाहन घंटों फंसे रहते हैं। अधूरे पिलर और लटकते लोहे के सरिए अंधेरे में जानलेवा साबित हो रहे हैं।
डिजाइन में बदलाव: हालिया रिपोर्टों के अनुसार, रेलवे और लोनिवि के बीच डिजाइन को लेकर चल रहा विवाद सुलझ गया है, लेकिन धरातल पर काम की रफ्तार अभी भी कछुआ चाल से चल रही है।
"अधूरा पुल प्रशासन की नाकामी का प्रतीक है। रात के समय यहाँ से गुजरना मौत को दावत देने जैसा है।" — स्थानीय निवासी
प्रशासन की प्रतिक्रिया
संबंधित कार्यदायी संस्था का कहना है कि नई डिजाइन को मंजूरी मिल चुकी है और बजट में हुई वृद्धि के बाद अब निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक काम पूरा नहीं होता, वे खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे।

कर्वी चित्रकूट

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