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डॉक्टोरल उत्कृष्टता की दिशा में सशक्त पहल: एक दिवसीय शोध कार्यशाला का सफल आयोजन

खानपुर कलां-13 फरवरी।भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय खानपुर कलां के प्रबंधन विभाग में “डॉक्टोरल शोध की आधारशिला एवं अकादमिक प्रबंधन” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की आयोजक विभागाध्यक्ष प्रो अंशु भारद्वाज ने बताया कि इस कार्यशाला का उद्देश्य शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों की शोध दक्षता, शैक्षणिक प्रबंधन क्षमता तथा डॉक्टोरल स्तर की तैयारी को सुदृढ़ करना है।
कार्यशाला में ओ पी जिंदल विश्वविद्यालय सोनीपत के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने संसाधन व्यक्तियों के रूप में सहभागिता की।
प्रथम सत्र में जे.आई.बी.एस. के अधिष्ठाता प्रो. पुलकित खन्ना ने “सहायक शैक्षणिक संबंधों का निर्माण” विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने शोधार्थी एवं मार्गदर्शक के मध्य समन्वय, सहपाठी सहयोग, शैक्षणिक संवाद तथा प्रभावी प्रतिपुष्टि की भूमिका को डॉक्टोरल यात्रा की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
द्वितीय सत्र में ओ.डी.एस. के अधिष्ठाता प्रो. डॉ. कृष्ण के. पांडेय ने डॉक्टोरल शोध प्रक्रिया की एक सुव्यवस्थित रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने शोध की स्पष्ट दिशा, समस्या की क्रमबद्ध पहचान तथा समकालीन शैक्षणिक विमर्श के अनुरूप शोध प्रश्नों के निर्धारण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
तृतीय सत्र में ओ.डी.एस. के सहायक प्राध्यापक डॉ. शांतनु त्रिवेदी ने “प्रभावी साहित्य समीक्षा” विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने साहित्य समीक्षा की क्रमबद्ध एवं विषयाधारित पद्धतियों, शोध सामग्री की खोज की रणनीतियों, साहित्य के विश्लेषण एवं संश्लेषण तथा शोध अंतर की पहचान के माध्यम से सुदृढ़ सैद्धांतिक आधार निर्माण की प्रक्रिया को विस्तार से स्पष्ट किया।
कुलपति प्रो. (डॉ.) सुदेश ने अपने संदेश में कहा कि शोध किसी भी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक आत्मा है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध के माध्यम से ही विश्वविद्यालय राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करता है। उन्होंने शोधार्थियों को नवाचार, मौलिकता एवं नैतिकता के साथ शोध कार्य करने के लिए प्रेरित किया तथा प्रबंधन विभाग द्वारा आयोजित इस पहल की सराहना की।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसे प्रो. डॉ. अंशु भारद्वाज ने प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी संसाधन व्यक्तियों के मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता की सराहना की।
यह कार्यशाला विश्वविद्यालय की शोध उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करने तथा शोधार्थियों के लिए सुदृढ़ एवं समृद्ध शैक्षणिक वातावरण विकसित करने की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित करती है।

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