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गुवाहाटी की सक्षम दीवानी न्यायालय ने 500 करोड़ के बहुचर्चित मानहानि विवाद में समन जारी किया

गुवाहाटी की सक्षम दीवानी न्यायालय ने 500 करोड़ के बहुचर्चित मानहानि विवाद में महत्वपूर्ण कार्यवाही करते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई, कांग्रेस नेता जितेंद्र सिंह, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा असमिया प्रतिदिन के स्वामी जयंत कुमार बरुआ को समन जारी किया है।

यह वाद असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा दायर किया गया है, जिसमें कथित रूप से उनकी व्यक्तिगत एवं पारिवारिक संपत्ति से जुड़े आरोपों को निराधार, असत्य और प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचाने वाला बताया गया है। न्यायालय ने आदेश में सभी प्रतिवादियों को 9 मार्च को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। समन जारी होने के साथ ही यह मामला औपचारिक रूप से न्यायिक परीक्षण के चरण में प्रवेश कर चुका है। सबसे महत्वपूर्ण विकास के रूप में न्यायालय ने एक ad interim (अंतरिम) निषेधाज्ञा पारित की है, जिसके तहत प्रतिवादियों को अगली सुनवाई तक मुख्यमंत्री या उनके परिवार से संबंधित कथित धन-संपत्ति संबंधी आरोपों पर कोई नई सामग्री प्रकाशित करने, प्रेस कॉन्फ्रेंस करने, सार्वजनिक बयान देने अथवा मीडिया में टिप्पणी करने से रोका गया है। यह आदेश प्रारंभिक स्तर पर याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और आरोपों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए पारित किया गया है। कानूनी दृष्टि से यह अंतरिम आदेश दीवानी प्रक्रिया संहिता (CPC) के प्रावधानों के अंतर्गत अस्थायी निषेधाज्ञा के स्वरूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य वाद के अंतिम निर्णय तक कथित अपूरणीय क्षति को रोकना है। न्यायालय आगामी सुनवाई में दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनेगा और यह निर्धारित करेगा कि अंतरिम संरक्षण को जारी रखा जाए, संशोधित किया जाए या निरस्त किया जाए। राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में यह मामला अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इसमें राज्य की सत्तारूढ़ सरकार और प्रमुख विपक्षी नेताओं के बीच प्रत्यक्ष टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। आने वाले दिनों में इस वाद की प्रगति असम की राजनीतिक परिस्थिति और सार्वजनिक विमर्श पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है।

यह वाद असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा दायर किया गया है, जिसमें कथित रूप से उनकी व्यक्तिगत एवं पारिवारिक संपत्ति से जुड़े आरोपों को निराधार, असत्य और प्रतिष्ठा को क्षति पहुँचाने वाला बताया गया है। न्यायालय ने आदेश में सभी प्रतिवादियों को 9 मार्च को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। समन जारी होने के साथ ही यह मामला औपचारिक रूप से न्यायिक परीक्षण के चरण में प्रवेश कर चुका है। सबसे महत्वपूर्ण विकास के रूप में न्यायालय ने एक ad interim (अंतरिम) निषेधाज्ञा पारित की है, जिसके तहत प्रतिवादियों को अगली सुनवाई तक मुख्यमंत्री या उनके परिवार से संबंधित कथित धन-संपत्ति संबंधी आरोपों पर कोई नई सामग्री प्रकाशित करने, प्रेस कॉन्फ्रेंस करने, सार्वजनिक बयान देने अथवा मीडिया में टिप्पणी करने से रोका गया है। यह आदेश प्रारंभिक स्तर पर याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और आरोपों की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए पारित किया गया है। कानूनी दृष्टि से यह अंतरिम आदेश दीवानी प्रक्रिया संहिता (CPC) के प्रावधानों के अंतर्गत अस्थायी निषेधाज्ञा के स्वरूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य वाद के अंतिम निर्णय तक कथित अपूरणीय क्षति को रोकना है। न्यायालय आगामी सुनवाई में दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनेगा और यह निर्धारित करेगा कि अंतरिम संरक्षण को जारी रखा जाए, संशोधित किया जाए या निरस्त किया जाए। राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में यह मामला अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इसमें राज्य की सत्तारूढ़ सरकार और प्रमुख विपक्षी नेताओं के बीच प्रत्यक्ष टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। आने वाले दिनों में इस वाद की प्रगति असम की राजनीतिक परिस्थिति और सार्वजनिक विमर्श पर व्यापक प्रभाव डाल सकती है।

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