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जयशंकर सिंह भदौरिया संवाददाता: बांका, बिहार *महाशिवरात्रि: आस्था की अमृत रात्रि*

बांका,13 फरवरी 2026: महाशिवरात्रि आस्था का अनुपम त्योहार है, जो फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है।यह भगवान शिव की महिमा का पर्व है, जो त्रिदेवों में महादेव के रुप में संहारक, सृजनकर्ता और संरक्षक हैं। शिवरात्रि की रात्रि अमृत की वर्षा वाली रात्रि मानी जाती है,जब शिव ने विषपान कर जगत की रक्षा की थी। पुराणों में वर्णित है कि इस दिन शिव-पार्वती का विवाह हुआ, इसलिए इसे 'महा विवाह रात्रि' भी कहते हैं।
इस पर्व की महिमा अतुलनीय है। व्रत रखने से पाप नष्ट होते हैं और मोक्ष प्राप्ति का द्वार खुलता है।शिव पुराण के अनुसार शिवरात्रि का व्रत करने वाला भक्त निर्धनता,रोग और संकटों से मुक्त हो जाता है। रात्रि के चारों पहर में जागरण कर शिवलिंग पर बेलपत्र, दूध-दही,भांग-धतूरा चढ़ाने से भोले बाबा प्रसन्न होते हैं।कांवर यात्रा, भजन-कीर्तन और रुद्राभिषेक से आस्था का सैलाब उमड़ने लगता है।
महाशिवरात्रि योग और ध्यान का भी प्रतीक है।यह फाल्गुन मास की अमावस्या को सूर्य-चन्द्र ग्रहण योग बनाती है जो आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती है। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन शिव-पार्वती के दर्शन करने से जीवन सुखमय हो जाता है।यह त्योहार अज्ञान के अंधकार को नष्ट कर ज्ञान का प्रकाश फैलाता है।

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