निषाद वंश राष्ट्र क्रांति विमर्श के अंश*
*🔥निषाद वंश राष्ट्र क्रांति विमर्श के अंश*
अब प्रश्न नहीं, प्रतिरोध होगा,
स्व समस्या का स्व समाधान होगा।
आदिवासी वंजल निषादों ने सदियों तक
सवाल पूछे,
याचना की,
वंचना सही,
शोषण झेला—
और हक, अधिकार, न्याय के लिए संघर्ष करते-करते पीढ़ियाँ गुजर गईं।
1947 की तथाकथित आज़ादी को भी
अब 78 वर्ष हो चले।
“जरायम पेशा” जैसे जन्मजात अपराध के कलंक से
1952 में मुक्ति मिली—
आज 74 वर्ष बीत चुके।
पर सच क्या बदला?
1871 के क्रूर कानून की आत्मा को
फेरी, फिशरी, फॉरेस्ट, माइनिंग एक्ट में जिंदा रखा गया।
आज उसी शोषण को
पेसा एक्ट की आड़ में
माझी-मांझी, मझवार में उलझाकर
निषाद समाज को बाँटने का षड्यंत्र जारी है।
✊ सवाल यह नहीं कि अत्याचार क्यों है—
सवाल यह है कि हम कब तक सहेंगे?
कब तक धरना?
कब तक ज्ञापन?
कब तक कोर्ट की दहलीज़?
कब तक वोट की भीख?
कब तक स्वार्थी नेताओं के पीछे,
जो वंजल समाज को और नीचे,
ले जाने में लगे हैं ।
कब तक हम अपना तन, मन, धन लुटाते,
वंजल निषाद जन को क्षीण करते रहोगे?
पहिले सब सोचिए! और बड़ा प्रश्न भी करिए
कब तक निषाद घटक संगठनों के नाम पर
विखंडन की राह पर चलते रहेंगे?
⚠️ निषाद समाज की समस्या
किसी एक राज्य की नहीं—
यह राष्ट्रीय संकट है।
शोषण, अत्याचार, बलात्कार,
जिंदा तक जलाने के जघन्य दुष्कृत्य,
इन समस्याओं का समाधान भी
राज्य-राज्य की लड़ाई में नहीं,
बल्कि राष्ट्रीय समन्वयक रणनीति में है।
अब समय आ गया है कि—
हम निषाद राष्ट्र क्रांति विमर्श से जुड़ें,
और उसी से हल निकाले
एक नई, निर्णायक रण-नीति—
🔥 निषाद राष्ट्र क्रांति 🔥
साथ ही,
निषाद स्व-शासित विधान (NPL) के
अनुपालन द्वारा
शिक्षा, आजीविका, तकनीक संसाधन,
और संस्कृति के
सर्वांगीण विकास के आयाम खड़े करें।
ताकि निषाद समाज—
✦ स्वावलंबी बने
✦ शोषणमुक्त हो
✦ संवैधानिक अधिकारों का स्वामी बने
✦ आधुनिक तकनीक से जुड़कर
समाज और राष्ट्र के विकास की
मुख्य धारा में नेतृत्व करे।
🌊 जल
🌳 जंगल
⛰️ गिरि/पहाड़
🏞️ नदी-घाटी
इनके मूल निवासी
आदिवासी निषाद समाज का
अब विलाप नहीं—आगाज़ करें।
एक पहचान, एक निशान, एक विधान के साथ —
यही निषाद राष्ट्र क्रांति विमर्श की पुकार है।
जय निषाद ,
जय भारत।