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मेरठ : बिजली कर्मचारी-अभियंताओं ने मांगों को लेकर हड़ताल की

नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर पश्चिमांचल में बिजली कर्मचारी और अभियंता गुरुवार को एक दिवसीय हड़ताल में शामिल हुए। प्रस्तावित हड़ताल को देखते हुए मुख्य अभियंता मेरठ जोन प्रथम मुनीश चोपड़ा ने अधीक्षण अभियंता शहर मोहम्मद अरशद, अधिसासी अभियंताओं प्रशांत सोनी, डीवी सिंह, वीपी सिंह, महेश कुमार और सौरभ मंगला शहर में भ्रमण करते रहे।

इसी के साथ ब्रेकडाउन और फाल्ट अटेंड कराने के लिए आपातकालीन व्यवस्था पुख्ता रखी। संघर्ष समिति संयोजक आलोक त्रिपाठी ने बताया कि यह हड़ताल पावर सेक्टर के निजीकरण के विरोध में, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 एवं प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 को वापस लेने तथा पावर सेक्टर के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग को लेकर की जा रही है।

राष्ट्रीय स्तर पर हो रही हड़ताल की एक प्रमुख मांग यह है कि पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त की जाय। बताया कि मेरठ के सभी कार्यालयों के बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता आज अपराह्न तीन बजे कार्यालय मुख्य अभियंता वितरण क्षेत्र प्रथम/द्वितीय मेरठ विक्टोरिया पार्क के प्रांगण में पहुंच कर निजीकरण और उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां वापस लेने, संविदा कर्मियों की छटनी बन्द कर उन्हें नियमित करने और पुराने पेंशन बहाली को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन करेंगे। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि पहली बार बिजली कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा और दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने भी आंदोलन में शामिल हुए। बिजली कर्मचारी, इंजीनियर, मजदूर संगठनों और किसानों की संयुक्त भागीदारी से आज की हड़ताल स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे बड़ी औद्योगिक कार्रवाई में से एक होगी। दूसरी ओर, ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने कहा कि देश के सभी बिजली कर्मचारी और अभियंता हड़ताल में बढ़-चढ़कर शामिल हुए। अपनी एकता का प्रदर्शन किया और आंदोलन को ऐतिहासिक बनाया। संघर्ष समिति ने चिंता व्यक्त की है कि बिजली क्षेत्र का निजीकरण (वितरण, उत्पादन और टीबीसीबी के जरिए ट्रांसमिशन) गरीब उपभोक्ताओं, छोटे एवं मध्यम उद्योगों तथा आम जनता के हितों के विरुद्ध है। इसलिए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 तथा उप्र में चल रही निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल वापस लिया जाना आवश्यक है।

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