logo

राष्ट्रगान से पहले गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’, गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइन जारी

भागलपुर | 12 फरवरी 2026

राष्ट्रगान से पहले गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’, गृह मंत्रालय की नई गाइडलाइन जारी

अब स्कूलों और सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगान से ठीक पहले तीन मिनट का ‘वंदे मातरम्’ गाया जाएगा। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने इस संबंध में 28 जनवरी को नई गाइडलाइन जारी की है। निर्देश के अनुसार, जहां भी राष्ट्रगान और वंदे मातरम् दोनों प्रस्तुत किए जाएं, वहां पहले ‘वंदे मातरम्’ और उसके बाद राष्ट्रगान होगा।

गाइडलाइन में स्पष्ट किया गया है कि वंदे मातरम् के सभी छह अंतरे गाए जाएंगे, जिन्हें पूरा करने में लगभग 3 मिनट 10 सेकंड का समय लगेगा। इसके बाद 52 सेकंड की निर्धारित अवधि में राष्ट्रगान प्रस्तुत किया जाएगा। यानी पूरे कार्यक्रम की शुरुआत लगभग चार मिनट के औपचारिक अनुशासन के साथ होगी।

खड़े होने को लेकर भी स्पष्टता

निर्देशों में यह भी कहा गया है कि वंदे मातरम् और राष्ट्रगान के दौरान सभी लोग सावधान की मुद्रा में खड़े रहेंगे। हालांकि, यदि किसी डॉक्यूमेंट्री या फिल्म के हिस्से के रूप में गीत बजाया जा रहा हो, तो खड़े होने की अनिवार्यता नहीं होगी, ताकि प्रस्तुति में व्यवधान न आए।

फिलहाल इस व्यवस्था का पालन न करने पर किसी दंड या कानूनी कार्रवाई का प्रावधान नहीं बताया गया है। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करना है।

स्कूलों में विशेष जोर

सरकारी स्कूलों में दिन की शुरुआत अब वंदे मातरम् से करने की बात कही गई है। शिक्षा विभाग को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि छात्रों में गीत के अर्थ और भाव को समझने की जागरूकता भी विकसित हो। शिक्षकों को इसके लिए प्रिंट सामग्री और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।

इतिहास से जुड़ी भावनाएं

वंदे मातरम् की रचना 19वीं सदी में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत संघर्ष और स्वाभिमान का प्रतीक बना। 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने इसे ‘राष्ट्रीय गीत’ का दर्जा दिया। 1905 के बंगाल विभाजन के विरोध में भी यह गीत व्यापक रूप से गूंजा था।

2002 में एक अंतरराष्ट्रीय सर्वेक्षण में इसे दुनिया के लोकप्रिय गीतों में स्थान मिला था। 1907 में मैडम भीकाजी कामा ने जर्मनी में जो पहला भारतीय तिरंगा फहराया था, उसमें भी ‘वंदे मातरम्’ अंकित था।

नई गाइडलाइन के बाद अब यह देखना होगा कि स्कूलों और सरकारी संस्थानों में इसे किस तरह अपनाया जाता है। हालांकि इतना तय है कि आने वाले समय में कार्यक्रमों की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ की सामूहिक गूंज से होगी, जो स्वतंत्रता आंदोलन की यादों को फिर ताजा करेगी।

0
3526 views