logo

ग्राम पंचायत बोरी का ‘मॉडल’ यात्री प्रतीक्षालय: विकास का वेटिंग रूम, यात्री अभी भी प्रतीक्षा में


ग्राम पंचायत बोरी का ‘मॉडल’ यात्री प्रतीक्षालय: विकास का वेटिंग रूम, यात्री अभी भी प्रतीक्षा में

*लाल टोपी राजू सोनी, राजनांदगांव*

राजनांदगांव जिले से महज़ 6 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत बोरी ने विकास का ऐसा “मॉडल” पेश किया है, जिसे देखने के बाद लगता है कि यहां योजनाएं तो समय पर पहुंच गईं, पर यात्री रास्ता भूल गए। सरकार ने जनता को धूप-बारिश से राहत देने के लिए दो यात्री प्रतीक्षालय बनवाए — एक ऐसा जो यात्रियों से ज्यादा योजनाओं का बोझ झेल रहा है, और दूसरा जो शुरू से ही यात्रियों के इंतज़ार में तपस्या कर रहा है।
साल 2010 में बना पहला प्रतीक्षालय कभी गांव की सांसों से जुड़ा हुआ था। यहां लोग बस का इंतज़ार करते, हालचाल पूछते और मौसम से बचते थे। मगर समय बदला और प्रतीक्षालय ने भी विकास की नई परिभाषा सुन ली। अब वह “व्यावसायिक परिसर” बनने की तैयारी में है। पंचायत का तर्क है कि शाम ढलते ही यह जगह सामाजिक समरसता का अनौपचारिक केंद्र बन जाती है, इसलिए बेहतर है कि इसे तोड़कर रोजगार का मंदिर खड़ा कर दिया जाए। यानी यात्री भले खड़े रहें, लेकिन व्यापार बैठना चाहिए।
दूसरा प्रतीक्षालय तो विकास की दूरदर्शिता का जीवंत स्मारक है। जहां बस रुकती नहीं, वहां प्रतीक्षालय खड़ा कर दिया गया — मानो यात्रियों को पहले ढांचा देखकर प्रेरित होना चाहिए कि वे यहां आकर बस रुकवाएं। फिलहाल वहां यात्री कम, धूल और जानवर ज्यादा नियमित रूप से हाजिरी लगाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्माण ज़रूरत से ज्यादा कागज़ी कल्पना और ठेकेदारी उत्साह का परिणाम है।
इसी बीच एक जागरूक ग्रामीण ने प्रशासन को याद दिलाया कि प्रतीक्षालय का काम व्यापार नहीं, जनता की सेवा है। उसके आवेदन से पुराने प्रतीक्षालय को तोड़ने की योजना पर ब्रेक लग गया। यह कदम उस व्यवस्था के लिए आईना है, जो कभी-कभी विकास को उपयोगिता से ज्यादा उपलब्धि मान बैठती है।
दरअसल, गांव का यात्री प्रतीक्षालय सिर्फ ईंट-गारे का ढांचा नहीं होता; वह किसानों, मजदूरों, छात्रों और बुजुर्गों की रोजमर्रा की जिंदगी का सहारा होता है। जब ऐसे ढांचे बिना ज़रूरत के खड़े किए जाते हैं या ज़रूरत के ढांचे गिराने की तैयारी होती है, तो विकास खुद वेटिंग रूम में बैठकर सोचने लगता है — “मैं आखिर किसके लिए आया हूं?”
ग्राम पंचायत बोरी का यह किस्सा पूछता है: क्या योजनाएं जमीन की ज़रूरत से बनती हैं या फाइलों की भूख से? अगर प्रतीक्षालय में यात्री नहीं और यात्रियों को प्रतीक्षालय नहीं, तो विकास शायद अभी भी अपनी बस का इंतज़ार कर रहा है।

Devashish Govind Tokekar
VANDE Bharat live tv news Nagpur
Editor/Reporter/Journalist
RNI:- MPBIL/25/A1465
Indian Council of press,Nagpur
Journalist Cell
All India Media Association
Nagpur District President
Delhi Crime Press
RNI NO : DELHIN/2005/15378
AD.Associate /Reporter
Contact no.
9422428110/9146095536
Head office:- plot no 18/19, flat no. 201,Harmony emporise, Payal -pallavi society new Manish Nagar somalwada nagpur - 440015

0
235 views