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अस्सी करोड़ का राजस्व और नौ करोड़ में कंगाल! आखिर पैसा गया कहाँ?

एक ओर जहाँ विभाग ने इस वर्ष लगभग 80 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर महज 9 करोड़ रुपये की राशि पर वित्तीय संकट और कंगाली जैसे हालात सामने आने से कई सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, आय और व्यय के आंकड़ों में भारी अंतर देखने को मिल रहा है। राजस्व के बड़े दावों के बावजूद बुनियादी सुविधाओं, विकास कार्यों और कर्मचारियों के भुगतान में देरी की शिकायतें सामने आ रही हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब राजस्व इतना अधिक है, तो फिर आर्थिक तंगी की स्थिति क्यों उत्पन्न हुई? क्या बजट प्रबंधन में कहीं बड़ी चूक हुई है या फिर धन का सही उपयोग नहीं किया गया?
विपक्षी दलों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि वित्तीय पारदर्शिता की कमी के कारण जनता को वास्तविक स्थिति से अवगत नहीं कराया जा रहा।
प्रशासन की ओर से अभी तक इस विषय में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
जांच की मांग तेज, जवाब का इंतजार
जनता अब यह जानना चाहती है कि 80 करोड़ के राजस्व के बावजूद 9 करोड़ की स्थिति में कंगाली क्यों दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

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