आखिरकार भारत 𝐔𝐍𝐎 स्थाई अध्यक्ष क्यों नहीं बन पाया,
ये बात बहुत लोग पूछते हैं। भारत UNO (संयुक्त राष्ट्र) का स्थायी सदस्य (Permanent Member) इसलिए नहीं बन पाया, इसके पीछे इतिहास + राजनीति + ताक़त का खेल है। सबसे बड़ी वजह: इतिहास जब UNO बना (1945): भारत तब ब्रिटिश शासन में था फैसले लेने का हक़ भारत के पास नहीं था इसलिए भारत को स्थायी सदस्य बनाने पर गंभीर चर्चा ही नहीं हुई स्थायी सदस्य कौन बने और क्यों? UNO की Security Council में 5 स्थायी सदस्य बने: 1. अमेरिका 2. रूस (तब सोवियत संघ) 3. ब्रिटेन 4. फ्रांस 5. चीन इन देशों को इसलिए चुना गया क्योंकि: इन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध जीता उस समय ये सुपरपावर थे इनके पास सेना + अर्थव्यवस्था + परमाणु ताकत थी VETO Power का खेल स्थायी सदस्यों के पास Veto Power होती है अगर नया देश जोड़ना है, तो इन 5 में से कोई भी एक मना कर दे → बात खत्म जैसे की पुलवामा अटैक होने के बाद भारत ने पाकिस्तान को आतंकवादी देश घोषित करने की नींव रखी लेकिन यूएनओ के 5 स्थाई देशों में से चीन ने मना कर दिया तो पाकिस्तान आतंकवादी देश साबित नहीं हो सका क्योंकि इन संगठन में से कोई एक देश मना कर देता है तो वह निर्णय सफल नहीं माना जाएगा क्योंकि इनके पास वीटो Vito पावर होती है यहीं पर भारत फँस जाता है: चीन भारत का विरोध करता है कुछ मौकों पर अमेरिका/अन्य देशों की प्राथमिकताएँ अलग रहीं भारत आज क्यों मजबूत दावेदार है? आज भारत: दुनिया की सबसे बड़ी आबादी तेज़ी से बढ़ती आर्थिक शक्ति मजबूत सेना और परमाणु शक्ति UN peacekeeping में बड़ा योगदान लोकतांत्रिक देश दुनिया के चौथे नंबर की जीडीपी चौथे नंबर की शक्तिशाली फोर्सUNO मैं भारत की सबसे अधिक सिक्योरिटी फोर्स होने के बावजूद भी भारत स्थाई अध्यक्ष नहीं बन पाया यह एक सोचने का विषय है इसीलिए आज भारत के साथ: जर्मनी, जापान, ब्राज़ील भी स्थायी सदस्य बनने की मांग कर रहे हैं फिर भी क्यों नहीं बन पाया? UNO का ढांचा बदलने के लिए 2/3 देशों की सहमति और 5 स्थायी सदस्यों की 100% मंज़ूरी चाहिए ये लगभग राजनीतिक रूप से बहुत मुश्किल है सीधी बात 👉 भारत योग्य है, 👉 लेकिन पुरानी व्यवस्था + चीन का विरोध + veto power रास्ता रोक रहे हैं। अगर चाहो तो मैं ये भी बता सकता हूँ: चीन भारत से क्यों डरता है क्या भविष्य में भारत के chances बढ़ रहे हैं या UNO की व्यवस्था कितनी unfair है 😏