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भुमकाल के समय माहरा समाज के नायक आयतु माहरा का योगदान


भुमकाल के समय माहरा समाज के नायक आयतु माहरा का योगदान

आयतु माहरा

आयतु माहरा भुमकाल काल (लगभग 1910 के आसपास) में माहरा समाज के ऐसे वीर नायक थे जिन्होंने बस्तर अंचल में आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संघर्ष किया।

प्रमुख योगदान

भुमकाल विद्रोह में सक्रिय भूमिका
आयतु माहरा ने अंग्रेजी शासन, लगान व्यवस्था और जंगल–जमीन पर बाहरी कब्ज़े के विरुद्ध भुमकाल आंदोलन में सक्रिय भागीदारी निभाई।

माहरा समाज का नेतृत्व
उन्होंने माहरा समाज को संगठित कर अन्य आदिवासी समाजों के साथ एकजुट किया, जिससे विद्रोह को जनआंदोलन का स्वरूप मिला।

जंगल–जमीन–जल की रक्षा
आयतु माहरा ने परंपरागत आदिवासी अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों का खुला विरोध किया।

सांस्कृतिक व सामाजिक चेतना
उन्होंने आदिवासी परंपराओं, भाषा और स्वशासन की भावना को मजबूत किया, जिससे समाज में आत्मसम्मान और साहस का संचार हुआ।

वीरता और बलिदान की मिसाल
आयतु माहरा का जीवन अन्याय के विरुद्ध डटकर खड़े होने और समाज के लिए बलिदान देने की प्रेरणा देता है।
ऐतिहासिक महत्व

आयतु माहरा का योगदान यह दर्शाता है कि भुमकाल केवल कुछ व्यक्तियों का विद्रोह नहीं था, बल्कि हर समाज के नायकों द्वारा लड़ा गया एक साझा स्वतंत्रता संग्राम था।

माहरा समाज के लिए आयतु माहरा आज भी गौरव, संघर्ष और स्वाभिमान के प्रतीक हैं।

Devashish Govind Tokekar
VANDE Bharat live tv news Nagpur
Editor/Reporter/Journalist
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