छापीहेड़ा में मृत गौवंश को कचरे की तरह खुले में फेंका जा रहा, धर्म अपमानित और श्वानों का आतंक बढ़ा
नगर के युवको ने मृत गाय को लेकर नगर परिषद् कार्यालय का किया घेराव
संवाददाता श्रवण कुमार अग्रवाल
राजगढ़/छापीहेड़ा
10 फरवरी 2026
नगर परिषद छापीहेड़ा की गंभीर लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है। नगर क्षेत्र में मृत गौवंश एवं अन्य मवेशियों को सम्मानजनक तरीके से दफनाने या वैज्ञानिक निस्तारण के बजाय खुले में फेंक दिया जा रहा है। यह न केवल पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि हिन्दू समाज की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला कृत्य भी बनता जा रहा है।
हिन्दू धर्म में गाय को माता का दर्जा प्राप्त है, किंतु नगर परिषद द्वारा मृत गौवंश को कचरे की तरह खुले में फेंकना प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा मानी जा रही है। नगर के कई इलाकों में सड़कों, खाली मैदानों और आबादी के पास मृत पशुओं के शव पड़े देखे जा सकते हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है और संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मृत पशुओं के खुले में पड़े रहने से आवारा श्वान उन्हें नोचते हैं, जिससे उनकी आक्रामक प्रवृत्ति और अधिक बढ़ जाती है। इसी का परिणाम है कि हाल ही में नगर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जब तीन–चार वर्ष की एक मासूम बच्ची पर आवारा श्वानों ने हमला कर दिया। बच्ची की हालत गंभीर होने पर उसे उच्च उपचार हेतु रेफर करना पड़ा। इसके बावजूद नगर परिषद द्वारा न तो आवारा श्वानों की रोकथाम के लिए कोई ठोस योजना बनाई गई और न ही मृत मवेशियों के निस्तारण की स्थायी व्यवस्था की गई। नागरिकों का आरोप है कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी नगर परिषद आँखें मूंदे बैठी है। मृत पशुओं के खुले में पड़े रहने से न केवल श्वानों का आतंक बढ़ रहा है, बल्कि गंभीर प्रकार का पर्यावरण प्रदूषण भी फैल रहा है, जिससे आमजन के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। सकल हिन्दू समाज छापीहेड़ा ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्य नगर पालिका अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए तत्काल कार्रवाई की माँग की है। ज्ञापन में मृत गौवंश एवं मवेशियों के लिए सम्मानजनक एवं वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था करने, स्थायी गौमृत्यु निस्तारण केंद्र बनाने तथा आवारा श्वानों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अभियान चलाने की माँग की गई है। नगर परिषद् अधिकारी हरिओंम शर्मा के द्वारा मृत गाय को उचित स्थान पर भूमिगत करवाया गया एवं गोशाला के लिए भूमि का 10 दिनों का में सीमांकन करवाने का आश्वाशन दिया गया साथ ही स्वनो को पकडवाने के लिए उचित इंतजाम किये जा रहे हे अब बड़ा सवाल यह है कि धार्मिक भावनाओं, जनस्वास्थ्य और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर नगर परिषद कब जागेगी? या फिर किसी और बड़ी घटना का इंतजार किया जाएगा।