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एक सैनिक की ज़िंदगी को समझना बहुत मुश्किल है।

एक सैनिक की ज़िंदगी को समझना बहुत मुश्किल है। ये जितनी आसान लगती है, उतनी होती नहीं। कोई सैलरी नहीं देखता। लेकिन कोई ये नहीं देखता कि हर दिन कितने सैनिक शहीद होते हैं। हमें सैनिकों की इज्ज़त करनी चाहिए, उन्हें अपना नौकर नहीं समझना चाहिए, क्योंकि नौकर तो दो दिन घर पर रहते हैं। बैठे तो काम चलेगा, सैनिक घर बैठे तो काम नहीं चलेगा, देश के बॉर्डर बदल रहे हैं, ऐसे मुश्किल हालात में सेना ड्यूटी नहीं करेगी तो समय नहीं लगेगा।

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