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पशुपालन विभाग अंतर्गत योजनाओं की समीक्षा, लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

पशुपालन विभाग अंतर्गत योजनाओं की समीक्षा, लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

राजगढ़ 05 फरवरी, 2026

कलेक्टर के निर्देशन में वर्ष 2025–26 अंतर्गत पशुपालन विभाग अंतर्गत योजनाओं के प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में योजनाओं के भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्यों के विरुद्ध उपलब्धियों की विस्तार से समीक्षा की गई। समीक्षा बैठक में डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, किसान क्रेडिट कार्ड (पशुपालन), आचार्य विद्यासागर गौसंवर्धन योजना, संयुक्त पशु प्रजनन (सूर्य पाथ), बैकयार्ड कुक्कुट इकाई, मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना, नंदीशाला योजना (गौशाला), अनुदान पर भेड़ एवं बकरी इकाई (10+1), पशुधन बीमा योजना, गोपालक प्रशिक्षण एवं मैत्री प्रशिक्षण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।

साथ ही राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम की समीक्षा की गई तथा शीअर धारा ग्राम योजना के तीनों चरणों की भी समीक्षा की गई। NADCP अंतर्गत FMD कार्यक्रम (राउंड–7) की समीक्षा में सारंगपुर में अत्यंत निम्न प्रदर्शन पाए जाने पर कलेक्टर डॉ. मिश्रा द्वारा कड़ी नाराजगी व्यक्त की गई। समीक्षा के दौरान ब्‍यावरा, नरसिंहगढ़ एवं जीरापुर में डेटा सुधारने के निर्देश दिए गए। सेक्स सॉर्टेड उपलब्धि में निम्न प्रदर्शन पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए।

नरसिंहगढ़ में कामधेनु योजना के अंतर्गत प्रकरणों के समय पर स्वीकृत नहीं किए जाने पर नाराजगी व्यक्त की गई तथा ब्यावरा एवं नरसिंहगढ़ में निम्न प्रदर्शन पर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। किसान क्रेडिट कार्ड (पशुपालन) वितरण योजना में ब्यावरा के निम्न प्रदर्शन पर डॉ. अनीता पवार एवं डॉ. श्रुति सुमन के विरुद्ध एक वेतन वृद्धि रोकने के निर्देश दिए गए। इस संबंध में आयुक्त, पशुपालन विभाग को पत्राचार करने के निर्देश भी दिए गए। मोबाइल वेटरनरी यूनिट/चलित पशु चिकित्सा इकाई में कॉल अटेंड नहीं किए जाने पर कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने कड़ी आपत्ति व्यक्त की और संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि बिना पशु टैगिंग के किसी भी योजना अंतर्गत अनुदान नहीं दिया जाएगा। यदि ऐसा किया गया तो राशि संबंधित व्यक्तिगत डॉक्टर के वेतन से वसूली जाएगी। साथ ही प्रत्येक प्रकरण के सैंक्शन एवं डिस्बर्समेंट की पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित व्यक्तिगत डॉक्टर की होगी। लापरवाही पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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