
महाशिवरात्रि पर देश भर के मंदिरों से बाबा विश्वनाथ को उपहार, सनातन एकता का सशक्त संदेश
वाराणसी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा आरंभ किए गए आध्यात्मिक नवाचार को देशभर के प्रमुख मंदिरों का व्यापक समर्थन मिल रहा है। यह पहल भगवान श्री काशी विश्वनाथ के प्रति अखिल भारतीय श्रद्धा, समर्पण और सनातन एकता का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आई है। मंदिर न्यास के अनुसार इस वर्ष देश के विभिन्न हिस्सों से काशी धाम को महाशिवरात्रि महोत्सव के लिए विशेष उपहार और शुभकामनाएं प्राप्त हो रही हैं।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्रा ने बताया कि श्री कृष्ण जन्मस्थली, मथुरा से भगवान श्री काशी विश्वनाथ महादेव के लिए श्रद्धा और सम्मान के साथ उपहार सामग्री भेजी गई है। मथुरा से प्राप्त वीडियो, फोटो और अन्य सामग्री को मंदिर न्यास ने जारी किया है। बताया गया कि यह पावन उपहार सामग्री देर रात तक काशी धाम पहुंच जाएगी, जबकि अगले दिन प्रातः विधिवत वैदिक विधि-विधान और सत्कार के साथ इनका स्वागत किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड, जम्मू से भी भगवान श्री विश्वनाथ के लिए उपहार सामग्री प्राप्त हो चुकी है। दक्षिण भारत से भी इस नवाचार को विशेष समर्थन मिला है। तमिलनाडु के कई प्रतिष्ठित मंदिरों ने लिखित रूप में अपनी सहभागिता का प्रस्ताव भेजा है। इनमें चिदंबरम मंदिर, मदुरई मीनाक्षी अम्मन मंदिर, द्रौपदी अम्मन मंदिर, थिरुकंडेश्वरम मंदिर, सबनायांगर मंदिर, पेरिया नयागी अम्मन मंदिर, संगारी काली अम्मन मंदिर, वेदा अघोरपुरेश्वर मंदिर, कुमारगुरु परमेश्वर मंदिर सहित अन्य प्रमुख मंदिर शामिल हैं।
इसके अलावा मुंबई स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर से भी भगवान श्री काशी विश्वनाथ महादेव के लिए उपहार प्रेषित किए जाने का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। इस प्रकार कुल 18 मंदिरों की ओर से महाशिवरात्रि महोत्सव के अवसर पर काशी विश्वनाथ धाम को श्रद्धा स्वरूप उपहार प्राप्त हो रहे हैं, जो सनातन धर्म की अखंडता और आपसी सांस्कृतिक जुड़ाव को दर्शाता है।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने देशभर के इन सभी मंदिरों के प्रबंधन, पुजारीगण और श्रद्धालु समाज के प्रति आभार व्यक्त किया है। न्यास ने यह भी भरोसा दिलाया कि भविष्य में इन मंदिरों के प्रमुख पर्वों पर भगवान श्री काशी विश्वनाथ की ओर से भी श्रद्धा स्वरूप उपहार भेजे जाएंगे। मंदिर न्यास ने कामना की है कि इस प्रकार का भावनात्मक और सांस्कृतिक समन्वय सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता को और अधिक सुदृढ़ बनाए।