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बीसलपुर के 'लाल' राकेश रतन का साहित्य जगत में बजा डंका, जल्लापुर गांव का नाम किया रोशन


​बीसलपुर (पीलीभीत):
प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती और जब वह साधना के साथ निखरती है, तो उसकी गूँज दूर-दूर तक सुनाई देती है। बीसलपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले छोटे से गाँव जल्लापुर के निवासी कवि राकेश रतन ने आज अपनी लेखनी और ओजपूर्ण वाणी के दम पर देश के बड़े साहित्यिक मंचों पर एक विशिष्ट पहचान बना ली है।
​साहित्यिक मंचों पर बढ़ती लोकप्रियता
​राकेश रतन ने हाल के वर्षों में देश के विभिन्न राज्यों में आयोजित प्रतिष्ठित कवि सम्मेलनों और सांस्कृतिक मंचों पर अपनी कविताओं के माध्यम से श्रोताओं का दिल जीता है। उनकी बढ़ती लोकप्रियता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें अब राष्ट्रीय स्तर के काव्य मंचों से लगातार निमंत्रण मिल रहे हैं। उनकी प्रस्तुति न केवल मनोरंजक होती है, बल्कि समाज के लिए एक गहरा संदेश भी समेटे होती है।
​रचनाओं में सामाजिक यथार्थ का संगम
​साहित्यकारों और विद्वानों के अनुसार, राकेश रतन की काव्य शैली की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सादगी और गहराई है। उनकी रचनाओं में मुख्य रूप से निम्न बिंदु उभर कर आते हैं:
​सामाजिक यथार्थ: समाज की जमीनी हकीकत का चित्रण।
​मानवीय संवेदनाएं: रिश्तों और भावनाओं की मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति।
​राष्ट्रभाव: देशप्रेम से ओत-प्रोत ओजपूर्ण कविताएं।
​गूढ़ अनुभव: जीवन के संघर्षों से निकले हुए विचारोत्तेजक शब्द।
​"राकेश रतन की कविताएं केवल कानों को सुख नहीं देतीं, बल्कि मानस पटल पर विचार के नए बीज बोती हैं।" — स्थानीय साहित्य प्रेमी
​युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत
​जल्लापुर जैसे ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय पटल पर अपनी जगह बनाना क्षेत्र के युवाओं के लिए गौरव की बात है। उनकी इस सफलता पर बीसलपुर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों और साहित्यकारों ने हर्ष व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि राकेश रतन की साहित्यिक प्रतिबद्धता और कड़ी मेहनत ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि संकल्प दृढ़ हो, तो संसाधन सफलता के आड़े नहीं आते।

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