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बेतला नेशनल पार्क उपेक्षा का शिकार, प्रभारी रेंजर के भरोसे विश्वविख्यात धरोहर छिपादोहर प्रतिनिधि। देश–विदेश में अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक विरास

बेतला नेशनल पार्क उपेक्षा का शिकार, प्रभारी रेंजर के भरोसे विश्वविख्यात धरोहर
छिपादोहर प्रतिनिधि।
देश–विदेश में अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक विरासत और दुर्लभ व विलुप्तप्राय जंगली जानवरों के सुरक्षित आवास के रूप में प्रसिद्ध बेतला नेशनल पार्क इन दिनों गंभीर प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार होता नजर आ रहा है। हैरानी की बात यह है कि पूरे नेशनल पार्क की देखरेख फिलहाल सिर्फ प्रभारी रेंजर के भरोसे छोड़ दी गई है।
जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष बेतला रेंज के स्थायी रेंजर शंकर पासवान के सेवानिवृत्त होने के बाद अब तक यहां किसी नए रेंजर की नियमित नियुक्ति नहीं की गई है। इसके बाद बेतला नेशनल पार्क का अतिरिक्त प्रभार पहले से ही आधा दर्जन रेंज की जिम्मेदारी संभाल रहे रेंजर उमेश कुमार दुबे को सौंप दिया गया।
स्थानीय जानकारों और वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि कई रेंज का प्रभार होने के कारण प्रभारी रेंजर बेतला को पर्याप्त समय नहीं दे पा रहे हैं। इसका सीधा असर पार्क की सुरक्षा व्यवस्था, वन्यजीव संरक्षण, पर्यटक प्रबंधन और अवैध गतिविधियों पर निगरानी पर पड़ रहा है।
बेतला नेशनल पार्क न केवल बाघ, तेंदुआ, हिरण, भालू जैसे जंगली जानवरों का आश्रय स्थल है, बल्कि यह ऐतिहासिक किला, घना जंगल और जैव विविधता के कारण झारखंड की पहचान भी है। ऐसे में इतने महत्वपूर्ण नेशनल पार्क को लंबे समय तक प्रभारी व्यवस्था पर छोड़ना वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि शीघ्र ही यहां स्थायी रेंजर की नियुक्ति नहीं की गई, तो वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटन दोनों को भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने राज्य सरकार और वन विभाग से बेतला नेशनल पार्क की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल नियमित रेंजर की पदस्थापना की मांग की है।
अब देखना यह है कि विश्वविख्यात बेतला नेशनल पार्क की इस अनदेखी पर जिम्मेदार अधिकारी कब तक चुप्पी साधे रहते हैं या कोई ठोस कदम उठाया जाता है।

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