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7–8 हजार में जान की ड्यूटी! बजट में न्याय नहीं तो 8 लाख ठेका कर्मचारी सरकार को झुकने पर मजबूर करेंगे जयपुर।

जयपुर 8 फरवरी। राजधानी जयपुर के शहीद स्मारक पर शनिवार को संविदा, निविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी। युवा हुंकार बेरोजगार संविदा-निविदा कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष मोनू चौधरी के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में कर्मचारियों ने वर्षों से चले आ रहे शोषण, असुरक्षा और अपमान के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई।

प्रदर्शन को संबोधित करते हुए मोनू चौधरी ने कहा कि प्रदेश में हजारों कर्मचारी ऐसे हैं जो 7 से 8 हजार रुपये की मामूली तनख्वाह में जान जोखिम में डालकर ड्यूटी कर रहे हैं। फायर ब्रिगेड कर्मचारी, 112 व 108 आपातकालीन सेवाओं के वाहन चालक, आईसीटी कंप्यूटर शिक्षक, व्यवसायिक शिक्षक, वार्ड बॉय और कार्यालयों में तैनात सुरक्षाकर्मी—सभी ठेका प्रथा के शिकार हैं।

उन्होंने बागरोता कांड का जिक्र करते हुए कहा कि फायर ब्रिगेड के कर्मचारी जलकर झुलस गए, लेकिन सरकार ने आज तक उनकी सुध नहीं ली।
“जिन सेवाओं पर आम जनता की जान टिकी है, वही कर्मचारी सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं—ना स्थायित्व, ना सम्मान, ना अधिकार,” उन्होंने कहा।

चौधरी ने सवाल उठाया कि जब काम पूरी तरह सरकारी है, जिम्मेदारी सरकारी है, तो कर्मचारी सरकारी क्यों नहीं?
उन्होंने बताया कि कार्मिक विभाग द्वारा जब कर्मचारियों का ब्योरा मांगा गया, तो कई विभागों ने साफ कह दिया—‘ये हमारे कर्मचारी नहीं हैं।’
“यह सबसे बड़ी विडंबना है। काम भी इनसे लिया जाता है और जरूरत पड़ने पर इन्हें अपनाने से इनकार कर दिया जाता है,” उन्होंने कहा।

भावुक स्वर में उन्होंने कहा—
“मैं उस कर्मचारी की आवाज हूँ जो अस्पताल में वार्ड बॉय बनकर सेवा करता है।
मैं उस कर्मचारी की आवाज हूँ जो सरकारी दफ्तर में आपकी गाड़ी को सैल्यूट कर एंट्री देता है।
मैं उस शिक्षक की आवाज हूँ जो सरकारी स्कूल में पढ़ाता है और मजबूरी में प्राइवेट नौकरी भी करता है।”

उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि राजस्थान में करीब 8 लाख आउटसोर्स और ठेका कर्मचारी हैं। उनके परिवारों को मिलाकर यह संख्या करीब 40 लाख वोटों तक पहुंचती है।
“यह ताकत किसी भी तख्त को हिला सकती है। सरकार यह भूल न करे कि संविधान के लिए काम करने वाला कर्मचारी कमजोर नहीं होता,” उन्होंने कहा।

11 तारीख को आने वाले बजट को लेकर चेतावनी देते हुए मोनू चौधरी ने कहा—
“अगर बजट में इस शोषण को खत्म करने की ठोस मंशा नहीं दिखी, तो कर्मचारी सरकार को पीछे कदम लेना सिखा देंगे।”

उन्होंने आरोप लगाया कि 2 तारीख से विधायकों से मिलने की पहल की गई, लेकिन कई जनप्रतिनिधियों ने कर्मचारियों से ठीक से बात तक नहीं की।
“यहां तक कहा गया कि ये लोग अपने हाथ का पानी भी नहीं पीना चाहते। क्या यही लोकतंत्र और संविधान का सम्मान है?” उन्होंने सवाल किया।

प्रदर्शन के अंत में उन्होंने दो टूक कहा—
“यह लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं, सम्मान, सुरक्षा और अधिकार की है।
जब तक न्याय नहीं मिलेगा, यह आवाज थमने वाली नहीं है।”

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