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काव्या कृषि फार्म भुवाखेड़ी,में सफेद और लाल चंदन के पौधों का रोपण किया।

छबड़ा:कस्बे के निकट स्थित भुवाखेड़ी ग्राम के काव्या कृषि फार्म,अमीरपुर खेड़ी में स्थित योग केंद्र पर किसान शंकर लाल नागर की देखरेख में मलिहाबाद लखनउ की प्लांट नर्सरी के जोगेंद्र सिंह आगरा से खरीदकर,गुणवत्तापूर्ण किस्म के 25 लाल और 25 सफेद चन्दन के पौधों का रोपण किया गया।इसके साथ ही 2-2 पौधे प्रायोगिक तौर पर आम,अमरूद,नीबू,अनार,नारंगी के पौधे भी रोपे गये।चन्दन मूल रूप से भारत में पाये जाने वाला पौधा है।चन्दन से तेल,इत्र,धूप,ओषधि ओर सोंदर्य प्रसादन के निर्माण में ओर नक्कासी में इसका उपयोग किया जाता है चन्दन तेल,चन्दन पाउडर,चन्दन साबुन,चन्दन इत्र।चन्दन के कम ग्रोथ पर भी 12 से 15 साल बाद चन्दन के पेड़ से 15 से 25 किलो रसदार लकड़ी मिल सकती है।रसदार लकड़ी का मार्केट रेट लगभग 6000 हजार से 12000 है।यदि रसदार लकड़ी 15 किलो भी मिल जाय तो 1 पेड़ से 1लाख रुपये तक कि इनकम हो सकती है।किसान भाइयों को परम्परागत कृषि के साथ कुछ नवीन शोध भी करने चाहिए जिससे उनकी आय बढ़ सके,क्योकि भारत मे आज भी कृषि,मानसून का जुंआ साबित हो रही है,धरती पुत्र आज भी ग़रीबी रेखा पर है क्योंकि लाख उपाय के बाद भी जनसंख्या नियंत्रित नही है,कृषि जोत लगातार घट रही है।

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