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फौजियों को पूरा दिया जाए सम्मान। सरकारी सोशल कामों में दी जाए कमान।।

होशियारपुर: 8th फरवरी,2026 (बूटा ठाकुर गढ़शंकर)
जब कोई सैनिक देश के प्रति अपनी सेवाओं से निवृत होकर पेंशन पर आता है तो सिविल में सभी को मनचाही नौकरी नहीं मिल पाती। कुछ एक तो दुकानदारी या छोटे मोटे बिजनेस में व्यस्त हो जाते हैं। लेकिन फ़िर भी बड़ी तदाद में ऐसे भी फौजी होते हैं जो कहीं भी खुद को एडजेस्ट नहीं कर पाते। हालांकि वे हरफन मौला होते हैं, अच्छे पढ़े लिखे और शिक्षित होते हैं उनमें हर टैलेंट होता है जो व्यर्थ ही जाता है।
ऐसे में सरकारों को उनकी तरफ़ ध्यान देने की जरूरत है। जब भी सेवा निवृति के बाद सैनिक घर आए पोस्को या सोल्जर बोर्ड के साथ साथ डिप्टी कमिश्नर का भी साक्षात्कार (इंटरव्यू) लाजमी तौर पर होना चाहिए। रीसेटलमेंट के पश्चात् बचे हुए सैनिकों को सरकार अपने उन सरकारी गतिविधियों में शामिल करे यहां वे अध्यापकों, आशा वर्करों, आंगनवाड़ी वर्करों,पटवारियों या पुलिस कर्मियों से फालतू के काम देकर उनके असली कामकाज को प्रभावित करती है। मसलन सरकारी कैंपों के आयोजन, चुनावों के प्रबंधन, यातायात की बाधाओं को दूर करने, स्कूलों/कॉलेजों/तहसीलों/अस्पतालों/बस अड्डों की सुरक्षा हेतु कार्यों में, जनगणना/मर्दमशुमारी जैसे कामों में, कुदरती आपदा प्रबंधन इत्यादि और भी बहुत सारे ऐसे कामों में यहां सरकार को मेन पावर की जरूरत होती है बिना किसी महकमे पर काम का फालतू बोझ डाले साबका सैनिकों की सेवाओं को तरजीह देनी चाहिए। इससे साबका सैनिकों का मान सम्मान भी बढ़ेगा और प्रशासनीय तंत्र भी राहत महसूस कर सकेंगे। सरकार की मजबूती भी बढ़ेगी। सरकार को चाहिए कि तहसील/गांव लेवल पर साबका सैनिकों की टीमें बनाकर उन्हें सरकारी तंत्र में शामिल करे। यह सरकार का सर्वश्रेष्ठ कार्य माना जाएगा।
नोट: सैनिक आम जनता से ख़ास होता है, उसे खास बनाकर रखना ही सरकार की प्रथम जिम्मेदारी हो।

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