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कुर्सी पर जो बैठेगा, काम तो करेगा ही, पर क्या दुख-सुख में साथ खड़ा होगा?" – रिंकी खान का भावनात्मक 'मास्टरस्ट्रोक'!

चिरकुंडा — "जिंदाबाद" के गगनभेदी नारों और "आपका अध्यक्ष कैसा हो? रिंकी खान जैसा हो!" की लयबद्ध गूंज के बीच, रिंकी खान ने चिरकुंडा अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। जहां अक्सर चुनाव विकास के वादों पर लड़े जाते हैं, वहीं रिंकी खान ने इस बार कंक्रीट की सड़कों से ज्यादा 'जज्बातों' और 'सहानुभूति' पर अपना दांव लगाया है।
पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने पारंपरिक राजनीति से हटकर एक बेहद सधा हुआ और भावनात्मक रुख अपनाया।
'कुर्सी' का सिद्धांत
जब उनसे पिछले पांच सालों में हुए काम के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने मौजूदा व्यवस्था को पूरी तरह खारिज करने के बजाय एक दिलचस्प तर्क दिया। उन्होंने माना कि प्रशासनिक काम कभी रुकता नहीं है।
रिंकी खान ने कहा, "ऐसा नहीं है कि काम नहीं होता... जो भी उस कुर्सी पर बैठेगा, वो काम तो करेगा ही। परफेक्टली काम करेगा।"
लेकिन, उन्होंने उस 'खालीपन' की ओर इशारा किया जिसे वे भरना चाहती हैं। उनका मानना है कि मुद्दा केवल काम का नहीं, बल्कि जनता से 'जुड़ाव' का है। उन्होंने कहा कि जनता शायद इसलिए नाराज हो सकती है क्योंकि नेता उनके "दुख-सुख" में उनके साथ खड़े होने की कोशिश कम करते हैं। वे इसी "प्यार और विश्वास" को फिर से जीतने के लिए मैदान में हैं।
आत्मविश्वास से भरी रिंकी खान ने कहा, "जनता के विश्वास पर ही आज हम लोग इतनी दूर पहुंचे हैं," और दावा किया कि उन्हें जनता का पूरा समर्थन मिलेगा।

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