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भबल भूसे में लहरा म्युनिसिपल काउंसिल के चुनाव, पांच साल पूरे होने के बाद भी अभी तक साफ नहीं।


7 फरवरी: लहरागागा (सुरेश जवाहर वाला 90233-63132) लहरा म्युनिसिपल काउंसिल के चुनाव को लेकर स्थानीय लोगों में भारी कंफ्यूजन और बेचैनी है। मौजूदा म्युनिसिपल काउंसिल कमेटी का टर्म पांच साल पूरा होने वाला है, लेकिन इसके बावजूद न तो सरकार ने नए चुनावों को लेकर कोई साफ घोषणा की है और न ही प्रशासन के पास कोई पक्की जानकारी है।

जब इस बारे में म्युनिसिपल काउंसिल के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर से बात की गई तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें चुनावों की तारीख के बारे में कोई जानकारी नहीं है और वह इस बारे में उच्च अधिकारियों से पता करेंगे। प्रशासनिक स्तर पर इस तरह की अनभिज्ञता ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यहां यह बताना जरूरी है कि म्युनिसिपल काउंसिल लहरा की वोटिंग 14 फरवरी, 2021 को हुई थी और इसके नतीजे 17 फरवरी, 2021 को घोषित किए गए थे। मौजूदा कैबिनेट मंत्री बीरिंदर गोयल ने इन चुनावों में बड़े जोश के साथ हिस्सा लिया था। उस समय की सरकार पर चुनाव नतीजों को गलत तरीके से पेश करने के भी गंभीर आरोप लगे थे, जिसकी वजह से मामला माननीय कोर्ट तक पहुंचा था। करीब दो साल की कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने कैबिनेट मंत्री बीरिंदर गोयल के उम्मीदवार के हक में फैसला सुनाया था। इस दौरान राज्य में राजनीतिक बदलाव हो चुका था और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार आ चुकी थी।

अगर म्युनिसिपल काउंसिल का टर्म 17 फरवरी 2021 को नतीजों की तारीख से गिना जाए, तो यह टर्म 2026 में खत्म होता है और इस आधार पर संविधान के आर्टिकल 243U के तहत नए चुनाव होने चाहिए। लेकिन दूसरी तरफ, कुछ सूत्रों का कहना है कि काउंसिल का टर्म उस दिन से गिना जाता है जब कमेटी की पहली मीटिंग हुई थी या पहला चुनाव हुआ था। इस हिसाब से लहरा म्युनिसिपल काउंसिल के चुनाव 2028-29 में होते दिख रहे हैं।

इन अलग-अलग मतलबों की वजह से चुनावों को लेकर उलझन और भी बढ़ गई है। लोकल नागरिक, सामाजिक संगठन और राजनीतिक वर्ग लगातार यह सवाल उठा रहे हैं कि डेमोक्रेटिक सिस्टम के तहत म्युनिसिपल काउंसिल के चुनाव समय पर क्यों नहीं हो रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, पंजाब में कई म्युनिसिपल काउंसिल के चुनावों पर वार्डबंदी या दूसरे कानूनी मामलों की वजह से बड़ी अदालतों ने रोक लगा दी है, लेकिन लेहरा म्युनिसिपल काउंसिल इस कैटेगरी में शामिल नहीं है। इसके बावजूद चुनावों में हो रही देरी ने सरकार की नीयत और एडमिनिस्ट्रेशन की परफॉर्मेंस पर सवालिया निशान लगा दिया है।
अब देखना यह है कि पंजाब सरकार लेहरा म्युनिसिपल काउंसिल चुनावों पर कब तक सफाई लाती है या यह मामला कुछ समय के लिए लटका रहेगा।

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