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द्वारीखाल में नहीं थम रहा जंगली जानवरों का आतंक, भालू के हमले में महिला गंभीररूप से घायल


द्वारीखाल (पौड़ी गढ़वाल)। पहाड़ के ग्रामीण इलाकों में जंगली जानवरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। ताज़ा मामला ब्लॉक द्वारीखाल के ग्राम चुरा का है, जहाँ 6 फरवरी को भालू के हमले में एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति आक्रोश भी देखा जा रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम चुरा निवासी सौदावरी देवी (पत्नी सते सिंह) की दुधारू गाय बीते दिन जंगल में चुगने गई थी, लेकिन देर रात तक घर वापस नहीं लौटी। गाय की तलाश में अगली सुबह लगभग 9 बजे सौदावरी देवी गाँव की कुछ अन्य महिलाओं के साथ जंगल की ओर निकलीं। जंगल के पास उन्हें गाय मृत अवस्था में मिली, जिसे गुलदार ने अपना शिकार बना लिया था। यह दृश्य देखकर सभी महिलाएं भयभीत हो गईं और वापस घर लौटने लगीं।
बताया जा रहा है कि अन्य महिलाएं तो घर लौट आईं, लेकिन सौदावरी देवी जंगल से निकलकर घर से कुछ दूरी पर घास काटने लगीं। इसी दौरान झाड़ियों में छिपे भालू ने अचानक उन पर हमला कर दिया। हमले में उनके सिर चेहरे और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और किसी तरह भालू को भगाया।
घटना की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण घायल महिला को तत्काल स्वास्थ्य केंद्र चेलूसैण लेकर पहुंचे, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेस हॉस्पिटल कोटद्वार रेफर कर दिया गया। वर्तमान में उनका उपचार जारी है और हालत अभी भी चिंताजनक बताई जा रही है।
इस घटना के बाद ग्राम चुरा सहित आसपास के क्षेत्रों में भय का वातावरण है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में गुलदार और भालू की आवाजाही लगातार बढ़ रही है, जिससे पशुधन और मानव जीवन दोनों खतरे में हैं। पूर्व में भी क्षेत्र में जंगली जानवरों के हमले की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए।
ग्रामीणों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, प्रभावित परिवार को तत्काल मुआवजा देने और जंगली जानवरों की गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में और बड़ी घटनाएं हो सकती हैं।
वन विभाग के अधिकारियों ने घटना की जानकारी मिलने की पुष्टि की है और मौके पर टीम भेजकर जांच की बात कही है। साथ ही ग्रामीणों से जंगल में अकेले न जाने और सतर्क रहने की अपील की गई है।
पहाड़ के गांवों में मानव और वन्यजीव संघर्ष लगातार गंभीर रूप लेता जा रहा है। ऐसे में आवश्यकता है कि प्रशासन, वन विभाग और स्थानीय समुदाय मिलकर दीर्घकालिक रणनीति तैयार करें, ताकि मानव जीवन और पशुधन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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