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शाही सुनेहरी मस्जिद चांदनी चौक

शाही सुनेहरी मस्जिद चांदनी चौक में सीसगंज गुरुद्वारे के साथ ही है, यह अठारवीं सदी की मस्जिद मुगल बादशाह मुहमद शाह के शासनकाल में उनके एक अमीर और खास और मुगल सरदार रोशन उद् दौला ने 1721 और 1722 के मध्यकाल में बनवाई थी, उसने यह मस्जिद अपने गुरु शाह भीक को समर्पित की थी.. जब 1739 में दिल्ली पर ईरानी क्रूर बादशाह नादिर शाह ने आक्रमण किया तो दिल्ली के मुगल बादशाह ने समर्पण भाव से उसका स्वागत किया लेकिन किसी बात पर ईरानी सेनकों से एक झड़प में कुछ ईरानी सेनक दिल्ली की जनता ने मार दिये.. इस बात पर नादिर शाह इतना क्रोधित हुआ कि उसने इसी मस्जिद की छत पर अपनी तलवार लहरा के दिल्ली को लूटने, और लोगों के कतल ए आम का हुक्म जारी किया और दिल्ली में कत्ल ए आम शुरू हुआ कई दिनों तक दिल्ली जलती रही और कत्ल ए आम होता रहा..नादिर शाह दिल्ली को लूट के और मुगलों का तख्त ए ताउस् और कोह ए नूर हीरा भी लूट के ले गया.. जिसे बाद में महाराजा रणजीत सिंह जी ने हासिल किया...उसके बाद दिल्ली को अंग्रेज़ों ने 1857 में लूटा और तबाह और उजाड़ा..कोह ए नूर हीरा महाराजा दलीप सिंह से ले लिया..तब भी दिल्ली को लूटा और तबाह किया गया. 1857 में सरदारों ने अंग्रेज़ों का लड़ाई में साथ दिया सीसगंज का मुगल पोलिस थाना जला दिया गया और यह जगह सीस गंज समिति को दे दी गई. . सुनहरी मस्जिद को भी नादिर शाह के दौर में नुकसान पोहन्चा था 1897 में इस को फिर से बनवाया गया... यह है दिल्ली की कहानी जो वदेशी हमलावरों के हाथों कई बार लूटी और बर्बाद हुई... .कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी..सदियों रहा है दौर ए ज़माँ हमारा..( भारत भूषण काटल)

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