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कृषि रथ के माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती हेतु किया जा रहा जागरूक

🔳कृषि रथ के माध्‍यम से किसानों को आधुनिक खेती हेतु किया जा रहा जागरूक

🔳यंत्रीकृत खेती अपनाकर किसान प्रति एकड़ कमा सकेंगे अतिरिक्‍त लाभ

🔳फरवरी - 'कृषक कल्याण वर्ष 2026' के अंतर्गत कलेक्‍टर श्री आशीष तिवारी के निर्देश पर कृषि विभाग का रथ इन दिनों जिले के गांवों में भ्रमण कर रहा है। इसी क्रम में विकासखंड ढीमरखेड़ा के विभिन्न ग्रामों में कृषि रथ के माध्‍यम से किसानों को आधुनिक खेती के प्रति जागरूक किया गया।

कृषि अभियांत्रिकी विभाग के उपयंत्री संदीप पीपाड़ा द्वारा किसानों को परंपरागत खेती और यंत्रीकृत (मशीनी) खेती के बीच तुलनात्मक अंतर समझाते हुए वैज्ञानिक तरीके से खेती करने के फायदे बताये गये। उपयंत्री संदीप पीपाड़ा ने किसानों को बताया कि परंपरागत खेती में 80-90 किलो बीज और अधिक खाद की जरूरत पड़ती है जिसका खर्च लगभग 6 हजार रूपये होता है। खेत की तैयारी के लिए 3 बार कल्टीवेटर और छिड़काव में अतिरिक्त 4 हजार रूपये व्यय होता है। साथ ही खरपतवार निकालने का अतिरिक्त खर्च लगभग 1 हजार रूपये सहित कुल लागत 11 हजार रूपये प्रति एकड़ हो जाती है।

वहीं यंत्रीकृत विधि (सुपर सीडर/हैप्पी सीडर) में मात्र 40 किलो बीज लगता है और खाद की भी बचत होती है जिसका खर्च 3 हजार रूपये होती है। सुपर सीडर यंत्र 2 हजार रूपये में एक ही बार में खेत की तैयारी, नरवाई प्रबंधन और बोनी कर देता है। नरवाई मिट्टी में मिलकर खाद का काम करती है, जिससे जमीन की शक्ति बढ़ती है। अर्थात यंत्रीकृत विधि से यही काम मात्र 5 हजार रुपये प्रति एकड़ में हो जाता है।

श्री पीपाड़ा ने गणना कर बताया कि यंत्रीकृत खेती न केवल लागत घटाती है, बल्कि उत्पादन में 25 से 30 प्रतिशत की वृद्धि भी करती है। इससे किसानों को प्रति एकड़ 4 से 5 क्विंटल अधिक उपज मिलती है, जिसका बाजार मूल्य लगभग 10 से 12 हजार रुपये होता है।

इस प्रकार यदि हम लागत में हुई 6 हजार रुपये की बचत और उत्पादन में हुई 11 हजार रुपये की वृद्धि को जोड़ें, तो किसान भाई प्रति एकड़ औसतन 17 हजार रुपये तक का अतिरिक्त लाभ कमा सकते हैं।

जिले के सभी किसानों को अधिक लाभ के लिये आधुनिक कृषि यंत्रों को अपनाने की अपील की है।
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