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नसीर साहब के साथ गोदी मीडिया की बदतमीजी! कितना गिरेगा "नीच" मीडिया!

दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह एक बार फिर मीडिया और प्रशासन के साथ हुए कड़वे अनुभवों को लेकर चर्चा में हैं। हालिया विवाद मुंबई विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम 'जश्न-ए-उर्दू' से जुड़ा है, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ी हुई है।
​यहाँ इस पूरे मामले की मुख्य बातें दी गई हैं:
​1. कार्यक्रम से आखिरी वक्त पर निकाला गया
​नसीरुद्दीन शाह को 1 फरवरी 2026 को मुंबई विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग द्वारा आयोजित 'जश्न-ए-उर्दू' में आमंत्रित किया गया था। अभिनेता का आरोप है कि कार्यक्रम से ठीक एक रात पहले (31 जनवरी) उन्हें फोन कर बताया गया कि उनकी मौजूदगी की आवश्यकता नहीं है।
​2. विश्वविद्यालय पर झूठ बोलने का आरोप
​शाह ने एक लेख के जरिए नाराजगी जताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय ने न केवल उन्हें 'अनइन्वाइट' किया, बल्कि कार्यक्रम में मौजूद लोगों से यह झूठ बोला कि उन्होंने खुद आने से मना कर दिया है। उन्होंने इसे "अपमानजनक और कायरतापूर्ण" व्यवहार बताया।
​3. 'गोदी मीडिया' और एयरपोर्ट पर झड़प
​इस विवाद के बीच जब नसीरुद्दीन शाह एयरपोर्ट पर दिखे, तो मीडियाकर्मियों (खासकर कुछ निजी समाचार चैनलों के रिपोर्टर्स) ने उन्हें घेर लिया। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि:
​रिपोर्टर लगातार उनके चेहरे के पास माइक ले जा रहे थे।
​नसीरुद्दीन शाह ने विनम्रता से बात करने से मना किया, लेकिन पीछा न छूटने पर वह भड़क गए।
​उन्होंने मीडिया के व्यवहार को "हैरेसमेंट" (उत्पीड़न) करार दिया और कहा कि "क्या आप देख नहीं सकते कि मैं यात्रा करके आया हूँ?"
​4. विवाद का कारण?
​चर्चा है कि विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारियों ने उनके राजनीतिक विचारों और देश के मौजूदा हालातों पर की जाने वाली टिप्पणियों के कारण उन्हें रोकने का फैसला किया। शाह ने इसे "थॉट पुलिसिंग" और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताया है।
​नोट: सोशल मीडिया पर यूजर्स मीडिया के इस आक्रामक रवैये की कड़ी आलोचना कर रहे हैं, जिसे अक्सर 'गोदी मीडिया' का टैग दिया जाता है। लोगों का कहना है कि एक सीनियर सिटीजन और लीजेंडरी एक्टर के साथ इस तरह की "बदतमीजी" पत्रकारिता के गिरते स्तर का प्रमाण है।

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