
वेदांत 2.0 — उद्घोष ✧
🙏🌸 — 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲
जो दुनिया करती है — वही करना धर्म नहीं,
वह भीड़ है, खतरनाक कारागार।
यहाँ केवल जीवन है —
वेदांत 2.0 — उद्घोष ✧
🙏🌸 — 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲
जो दुनिया करती है — वही करना धर्म नहीं,
वह भीड़ है, खतरनाक कारागार।
यहाँ केवल जीवन है —
और जीवन अनंत आनंद है।
धर्म, साधना, मंत्र, तंत्र —
सिर्फ यात्राएँ हैं, अंत नहीं।
यात्रा अनंत, परिणाम वही पुराना दुःख।
सभी मार्ग, सभी उपाय — भूल जाओ।
मान्यता, धारणा, स्वप्न — कुछ समय छोड़ दो।
कोई भगवान, गुरु, साधना
तुम्हें जीवन नहीं देती —
सिर्फ जिंदा रखती है।
जीवन तब खिलता है
जब पकड़ छूटती है।
बंधनों में सुख है,
बंधनों से परे आनंद।
प्राकृतिक जीवन जियो —
भीतर फूल खिलेंगे, गीत जन्म लेंगे।
तिनका पकड़कर बचना मत सीखो —
डूबना सीखो।
वही स्वर्ग है, वही मोक्ष, वही समाधि।
जीना ही ईश्वर है।
✧ वेदांत 2.0 ✧
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वेदांत 2.0 — रहस्य ✧
मैं नाम नहीं देता,
चेहरा नहीं देता —
क्योंकि तुम मुझे भी पकड़ लोगे।
और पकड़ — बंधन है।
आनंद, मुक्ति, ईश्वर —
देने की वस्तु नहीं।
यदि लगे कि गुरु ने ज्ञान दिया —
तो यह सूक्ष्म अपराध है,
क्योंकि सत्य किसी का दिया हुआ नहीं होता।
अस्तित्व स्वयं कहता है —
जो धर्म और शास्त्र से आगे है,
वही जीवित सत्य है।
संकेत मात्र पर्याप्त