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बोर्ड परीक्षा में कैसे रहें तनाव मुक्त

बोर्ड परीक्षा में कैसे रहें तनाव मुक्त
परीक्षा के समय विद्यार्थियों में तनाव होना एक सामान्य समस्या है। इसका प्रभाव न केवल उनकी पढ़ाई पर पड़ता है, बल्कि माता-पिता भी इस चिंता से अछूते नहीं रहते। ऐसे में यह आवश्यक हो जाता है कि विद्यार्थी और अभिभावक दोनों मिलकर इस तनाव को समझें और उसे दूर करने का प्रयास करें।
इस लेख के माध्यम से मैं अपने निजी विचार साझा कर रहा हूँ, जिससे आने वाली बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थी और उनके माता-पिता तनावमुक्त रहकर बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
जीवन भी एक परीक्षा है
बच्चों, हमारा सम्पूर्ण जीवन ही किसी न किसी परीक्षा के इर्द-गिर्द घूमता रहता है — चाहे वह करियर बनाने की परीक्षा हो या जीवन की कठिन परिस्थितियों से जूझने की। ऐसे में तनाव होना स्वाभाविक है, लेकिन उस तनाव को अपने ऊपर हावी होने देना हमारी पहली हार बन जाता है।
अक्सर विद्यार्थी परीक्षा की तैयारी तभी शुरू करते हैं जब परीक्षा की तिथि घोषित हो जाती है या जब हालात प्रतिकूल हो जाते हैं। यही सबसे बड़ी भूल होती है। वास्तव में, बोर्ड परीक्षा की तैयारी उसी दिन से शुरू हो जानी चाहिए जिस दिन विद्यार्थी ने विद्यालय में प्रवेश लिया। यदि शुरुआत से ही नियमित अध्ययन किया जाए, तो बोर्ड परीक्षा एक बोझ नहीं बल्कि एक रोचक चुनौती बन सकती है।
माता-पिता की भूमिका
मैं सभी माता-पिता से कहना चाहूँगा कि वे बच्चों पर पढ़ाई को लेकर अत्यधिक दबाव न डालें। बोर्ड परीक्षा को लेकर वैसे ही हर विद्यार्थी तनाव में रहता है, ऐसे में माता-पिता का अतिरिक्त दबाव उस तनाव को और बढ़ा देता है।
अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों के खान-पान पर विशेष ध्यान दें और उन्हें यह समझाएँ कि बोर्ड परीक्षा कोई असाधारण युद्ध नहीं, बल्कि एक सामान्य परीक्षा है। उन्हें यह प्रेरणा दें कि वे हर विषय का समय-समय पर पुनरावृत्ति (रिवीजन) करें और रटने के बजाय विषय को समझकर पढ़ें।
तनाव दूर करने के व्यावहारिक उपाय
यदि विद्यार्थी नीचे दिए गए बिंदुओं को अपनाएँ, तो निश्चित रूप से परीक्षा के समय तनाव से बचा जा सकता है—
1. कमजोर विषयों पर अधिक ध्यान दें
जिस विषय में आपको कठिनाई होती है, उसे अधिक समय दें। यदि हिन्दी, संस्कृत और इतिहास में एक-एक घंटा देते हैं, लेकिन भूगोल आपको कठिन लगता है, तो भूगोल को अधिक समय देना चाहिए।
2. विषयों का संतुलित क्रम बनाएँ
यदि गणित अच्छी है लेकिन हिन्दी और अंग्रेज़ी कमजोर हैं, तो पढ़ाई का क्रम ऐसा रखें—
पहले हिन्दी, फिर गणित, उसके बाद अंग्रेज़ी।
इससे कठिन विषयों के बीच आसान विषय आने से मानसिक संतुलन बना रहता है।
3. लगातार एक ही विषय न पढ़ें
एक विषय पढ़ने के बाद तुरंत दूसरा विषय शुरू करना सही नहीं है। जैसे यदि आपने जीवविज्ञान (बायोलॉजी) पढ़ा है, तो उसके बाद आधे घंटे का अंतराल लें, फिर रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) पढ़ें।
4. परीक्षा से पहले किताबें बंद कर दें
बहुत से विद्यार्थी परीक्षा केंद्र जाते समय भी पढ़ते रहते हैं, जो गलत आदत है। परीक्षा शुरू होने से कम से कम 45 मिनट पहले किताबें बंद कर दें और हल्की सैर करें, ताकि मन शांत रहे।
5. नींद का पूरा ध्यान रखें
रात भर जागकर पढ़ना किसी भी तरह लाभकारी नहीं होता। परीक्षा के समय भरपूर नींद आवश्यक है।
जल्दी सोना और जल्दी उठना स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है और पढ़ाई के लिए भी।
सुबह उठकर ताजी हवा में टहलें, फिर नित्य क्रिया से निवृत्त होकर पढ़ाई करें।
6. परीक्षा केंद्र समय से पहले पहुँचें
अंतिम समय तक बाहर बैठकर पढ़ते रहना गलत है। परीक्षा शुरू होने से कम से कम 10 मिनट पहले अपनी सीट पर बैठ जाएँ और मन को शांत रखें।
7. प्रश्न पत्र पढ़ने की आदत डालें
पेपर मिलते ही लिखना शुरू न करें। पहले प्रश्न पत्र को तीन बार ध्यानपूर्वक पढ़ें और प्रश्नों को तीन भागों में बाँटें—
जो पूरी तरह आते हों
जिनमें थोड़ा सोचने की आवश्यकता हो
जो कठिन हों
पहले आसान प्रश्न हल करें, फिर मध्यम और अंत में कठिन प्रश्न।
8. लिखने की गति (स्पीड) बढ़ाएँ
अक्सर विद्यार्थी कहते हैं कि उत्तर आता था, लेकिन समय समाप्त हो गया। इससे बचने के लिए लिखने की गति अच्छी होनी चाहिए।
इसके लिए रोज़ कम से कम चार पन्ने लिखने का अभ्यास करें।
निष्कर्ष
यदि विद्यार्थी इन छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दें और माता-पिता सहयोगी भूमिका निभाएँ, तो परीक्षा का डर अपने आप दूर हो जाएगा।
तनाव से मुक्त होकर पढ़ाई करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है, आत्मविश्वास मजबूत होता है और सफलता की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
याद रखें — परीक्षा जीवन का अंत नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का एक माध्यम है।
आत्मविश्वास, नियमित अभ्यास और सकारात्मक सोच ही सफलता की कुंजी है।

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