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देश के करोड़ों लोगों की सेहत और सरकारी राजस्व से जुड़ा 'महाघोटाला' – मीडिया के साथियों के लिए बड़ी चुनौती!

साथियों, नमस्कार।
आज मैं आपके सामने एक ऐसी कड़वी सच्चाई रख रहा हूँ, जिसे सुनकर शायद आपकी सुबह की चाय का स्वाद बदल जाए। पिछले कई वर्षों से चाय उद्योग की ज़मीनी हकीकत खंगालने के बाद, मैंने कुछ ऐसे राज़ और सबूत इकट्ठा किए हैं जो देश के बड़े कॉर्पोरेट घरानों और सरकारी तंत्र की मिलीभगत को बेनकाब कर सकते हैं।
मामला क्या है?
चाय—जो पानी के बाद सबसे ज्यादा पी जाती है—उसमें नामी कंपनियों द्वारा भारी मिलावट, GST की चोरी, मूल्यों का अवैध निर्धारण और मजदूरों का भयानक शोषण किया जा रहा है।
सिस्टम की रहस्यमयी चुप्पी:
एक जागरूक नागरिक और मीडियाकर्मी के नाते, मैंने पिछले कई महीनों में टी-बोर्ड (Tea Board), GST विभाग और भारत सरकार के संबंधित विभागों को दो से तीन बार विस्तृत ईमेल भेजे। पुख्ता सबूत दिए। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी शासन और प्रशासन की चुप्पी यह चीख-चीख कर कह रही है कि 'दाल में कुछ काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है'।
AIMA परिवार से अपील:
मैं खुद इस एसोसिएशन का हिस्सा हूँ और अब यह लड़ाई अकेले मेरी नहीं, बल्कि हम सबकी है। मेरे पास वो तमाम सबूत और राज़ मौजूद हैं जो नेशनल लेवल पर एक बड़ी 'ब्रेकिंग न्यूज़' और 'इन्वेस्टिगेटिव सीरीज' का आधार बन सकते हैं।
हमें क्या करना है?
जो भी मीडिया साथी या पोर्टल इस जनहित के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाना चाहते हैं और भ्रष्ट तंत्र को हिलाने का साहस रखते हैं, मैं उन्हें पूरी जानकारी और दस्तावेज़ देने के लिए तैयार हूँ।
क्या हम करोड़ों उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ होने देंगे?
क्या सरकारी विभागों की इस चुप्पी पर सवाल नहीं उठना चाहिए?
साथियों, यह वक्त एकजुट होकर एक बड़े स्कैम को उजागर करने का है। जो साथी इसमें रुचि रखते हैं, कृपया मुझसे संपर्क करें।

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