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मान्धाता ब्लॉक धरमपुर गाँव की बेटी गुलशमा ने रचा इतिहास, JRF क्वालिफ़ाई कर गाँव का नाम रोशन किया


धरमपुर जैसे छोटे से गाँव से उठकर किसी लड़की का उच्च शिक्षा तक पहुँचना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। यहाँ आम तौर पर लड़कियों का हाई स्कूल या इंटर तक पढ़ लेना ही बड़ी बात समझी जाती है। ऐसे माहौल में गुलशमा का पीएच.डी. जैसी उच्च शिक्षा की ओर बढ़ना और JRF (Junior Research Fellowship) क्वालिफ़ाई करना न सिर्फ़ उनके परिवार, नहीं बल्कि पूरे गाँव के लिए गर्व का विषय है।
गुलशमा की शैक्षणिक यात्रा आसान नहीं रही। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा धरमपुर इमदादुल उलूम मदरसे से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने गवर्नमेंट इस्लामिया इंटर कॉलेज रामपुर बजहा से हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। सीमित संसाधनों और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने आगे पढ़ने का सपना नहीं छोड़ा।
उच्च शिक्षा की चाह ने उन्हें इलाहाबाद विश्वविद्यालय तक पहुँचाया, जहाँ से उन्होंने आगे की पढ़ाई जारी रखी और आज वह पीएच.डी. की शोधार्थी हैं। इस दौरान उन्होंने कई बार NET परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन JRF कुछ अंकों से छूटता रहा। बार-बार असफलता के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।
गुलशमा का कहना है कि उन्हें अल्लाह पर पूरा भरोसा था और खुद पर अटूट विश्वास। यही विश्वास और निरंतर मेहनत आज रंग लाई और उन्होंने JRF क्वालिफ़ाई कर लिया।
यह सफलता सिर्फ़ एक परीक्षा पास करने की नहीं है, बल्कि यह उस सोच की जीत है जो कहती है कि गाँव की लड़कियाँ आगे नहीं बढ़ सकतीं। गुलशमा आज उन तमाम लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं जो सीमित संसाधनों और सामाजिक बंदिशों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देती हैं।

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