
TMC chief ममता दीदी ने सरकार को सीधा कटघरे में खड़ा कर दिया।
अब तक की सबसे सनसनीखेज खबर
TMC chief ममता दीदी ने सरकार को सीधा कटघरे में खड़ा कर दिया। ना बात, ना आंदोलन अब सीधा सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
आजादी के बाद देश में पहली बार ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया गया है जो की अपने आप में एक इतिहास बन जाएगा। ऐसी क्या नौबत आई की एक मुख्यमंत्री को देश की सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट में पहली बार खुद सीएम ने की पैरवी; ममता ने 13 मिनट दी दलीले
पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ जारी सियासी घमासान बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में दिखा। बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने एसआईआर के खिलाफ दाखिल अपनी याचिका पर खुद दलीलें रखीं। यह पहली बार है जब किसी मौजूदा सीएम ने सुप्रीम कोर्ट में खुद दलीलें रखीं। सीजेआई सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने पेश ममता ने हाथ जोड़कर कहा, चुनाव से पहले बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। हमें कहीं न्याय नहीं मिल रहा।
ममता ने कहा, 'शादी के बाद सरनेम बदलने, काम के कारण पता बदलने वालों और छोटी-मोटी स्पेलिंग कमियों को डिस्क्रिपेंसी बताकर 1.36 करोड़ नोटिस जारी हुए। मैंने आयोग को 6 पत्र भेजे, जवाब नहीं मिला, इसलिए मुझे कोर्ट आना पड़ा। कोर्ट के निर्देशों के बावजूद आधार कार्ड को वैध नहीं मान रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों में ऐसा किया गया।' सीजेआई ने आयोग से कहा- छोटी-मोटी स्पेलिंग या तकनीकी अंतर पर नोटिस देते वक्त संवेदनशील होना चाहिए।
महाभियोग पर विपक्ष में चर्चाः मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को लेकर साझा विपक्ष फैसला करेगा। कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने कहा, टीएमसी ने इस मुद्दे पर संपर्क किया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी ममता के समर्थन में हैं।
| सीजेआई की कोर्ट... ममता ने 3 घंटे किया केस का इंतजार
सफेद साड़ी और काली शॉल में ममता सवा 10 बजे जजों के बैठने के पहले कोर्ट पहुंचीं। केस कोर्ट नंबर-1 में 37वें नंबर पर था। 21वां, 36वां केस भी एसआईआर का था। तीनों की सुनवाई 12:55 बजे शुरू हुई। इससे पहले करीब 3 घंटे ममता चुपचाप कार्रवाई देखती रहीं। वकील और याची उनका वीडियो बनाते रहे।
कोर्ट रूम लाइव
निर्वाचन आयोग वॉट्सएप कमीशन बन गयाः ममता असली-पात्र वोटर बाहर नहीं होने चाहिएः सीजेआई
सीजेआईः राज्य के एग्जीक्यूटिव हेड भी यहां हैं।
ममताः मैं रवींद्रनाथ टैगोर को कोट कर रही हूं-'जब हमें न्याय नहीं मिलता, तब न्याय दरवाजे के पीछे रोता है।' मैं कोई खास व्यक्ति नहीं, एक बंधुआ जैसी हूं। पार्टी के लिए नहीं, आम लोगों के लिए आई हूं। (हाथ जोड़कर) मीलॉर्ड, केवल पांच मिनट दीजिए। सीजेआईः पांच नहीं, 15 मिनट देंगे। हर समस्या का समाधान होता है। केवल तीन आधार ऐसे हैं, जिन पर नाम काटने पर आपत्ति नहीं हो सकती दोषसिद्धि, माइग्रेट और गैर-नागरिक। तकनीकी या भाषाई गलती से असली नागरिक बाहर नहीं होने चाहिए।
आयोगः याचिका की कॉपी नहीं मिली। समय दें। सीजेआईः यह मामला पहली बार आया है। इसलिए कॉपी नहीं मिली। अगर रॉय, दत्ता, गांगुली जैसे नामों की स्पेलिंग अलग-अलग है तो यह गंभीर मुद्दा है। ममताः अन्य राज्यों में डोमिसाइल, फैमिली रजिस्टर, आधार और सरकारी दस्तावेज माने गए। चुनावी साल में बंगाल को टारगेट किया गया। 24
साल बाद 4 महीने में इतनी क्या जल्दी थी? यह
असम में नहीं हुआ, नार्थईस्ट में नहीं हुआ, क्यों? सीजेआईः डिस्क्रिपेंसी के मामलों में स्थानीय भाषा समझने वाली टीम आयोग की मदद कर सकती है। ममताः आयोग ने डीओ, ईआरओ और बीएलओ की शक्तियां खत्म कर दीं। 3800 माइक्रो-ऑब्जर्वर लगाए हैं। 58 लाख नाम 'मृत' बताएं, जिनमें कई जीवित हैं। सीजेआईः जरूरत पड़ी तो निर्देश देंगे कि हर नोटिस बीएलओ की अनुमति से ही जारी हो। ममताः माइक्रो-ऑब्जर्वर फाइनल अथॉरिटी है। इलेक्शन कमीशन वॉट्सएप कमीशन बन गया है। आयोगः राज्य ने पर्याप्त क्लास 2 अफसर नहीं दिए। इसलिए माइक्रो-ऑब्जर्वर नियुक्त करने पड़े। सीजेआईः सोमवार को फिर सुनेंगे, तब तक राज्य क्लास-2 अधिकारियों की सूची पेश करे।
ममताः मेरी आखिरी विनती है- लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी के नाम पर किसी का नाम सूची से न हटाया जाए। लोकतंत्र बचाइए। न्याय चाहिए।