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लोंगवाला में सार्वजनिक रास्तों पर कब्जे की कोशिश, हाईकोर्ट आदेशों की अनदेखी से भड़का गांव

लोंगवाला में सार्वजनिक रास्तों पर कब्जे की कोशिश, हाईकोर्ट आदेशों की अनदेखी से भड़का गांव

ग्रामीण आज कलेक्टर से मिलेंगे, जिला परिषद CEO के खिलाफ धरने की चेतावनी

पीलीबंगा । (राजेश खारड़ू)ग्राम पंचायत लोंगवाला में सार्वजनिक रास्तों को लेकर किया गया विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। माननीय उच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद गांव के मुख्य दो सार्वजनिक रास्तों और भूखंड पर कब्जा कर दीवार निर्माण की कोशिश ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शनिवार को गांव की पांच गलियों को जोड़ने वाले प्रमुख रास्तों को दीवार खड़ी कर बंद करने की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। मौके पर पहुंची प्रशासनिक टीम ने मध्यस्थता के जरिए दीवार निर्माण रुकवाया और आमजन के लिए रास्ता पुनः खुलवाया। इस घटनाक्रम से गांव में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण हालात बन गए थे।
सामूहिक रोष प्रदर्शन का निर्णय
भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा न बने, इसे लेकर ग्राम पंचायत लोंगवाला के समस्त ग्रामीणों ने गुरुवार को जिला कलेक्टर, हनुमानगढ़ को ज्ञापन देने का निर्णय लिया है।
ग्रामीणों की मांग है कि गांव के मुख्य सार्वजनिक रास्तों को स्थायी रूप से सुचारू रखा जाए और गाड़ियां लुहार समुदाय को बेदखल न किया जाए, ताकि उन्हें राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
जिला परिषद CEO पर भेदभाव का आरोप
ग्रामीणों ने जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पर भेदभावपूर्ण नीति अपनाने और दुर्भावनापूर्ण जांच करवाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद गलियों को बंद करने की मंशा से जांचें करवाई गईं और पंचायत समिति की स्टेंडिंग कमेटी से एकतरफा आदेश पारित करवा लिए गए, जिन्हें अब तक निरस्त नहीं किया गया।
आदेश निरस्त नहीं हुए तो धरना तय
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इन आदेशों को निरस्त नहीं किया गया, तो वे जिला परिषद CEO के आवास के दोनों ओर धरना देंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक गाड़ियां लुहार समुदाय को बेदखल करने और गांव के मुख्य रास्ते बंद करने की कोशिशों पर रोक नहीं लगाई जाती।
लोंगवाला का यह मामला अब केवल रास्तों का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रशासनिक निष्पक्षता और न्याय की कसौटी बन चुका है। आने वाले दिनों में प्रशासन की भूमिका पर पूरे जिले की नजरें टिकी हुई हैं।

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