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राजकीय मेडिकल कॉलेज में मानवता शर्मसार फर्श पर तड़पता रहा मरीज डॉक्टर-स्टाफ बने मूकदर्शक

उरई। जालौन राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। इलाज के लिए लाए गए एक बुजुर्ग मरीज की हालत बिगड़ने पर वह वार्ड के फर्श पर गिरकर तड़पता रहा, लेकिन मौजूद डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ तमाशबीन बने रहे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मरीज के गिरने की सूचना देने के बावजूद स्टाफ ने तत्काल कोई चिकित्सकीय सहायता नहीं दी। आरोप है कि डॉक्टर और कर्मचारी कुर्सियों पर बैठकर आपस में बातचीत और मौज-मस्ती करते रहे, जबकि मरीज दर्द से कराहता रहा। न तो उसे समय पर बेड उपलब्ध कराया गया और न ही प्राथमिक उपचार।

बताया जा रहा है कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल अज्ञात मरीजों को राहगीर अस्पताल तक पहुंचा देते हैं, लेकिन मेडिकल कॉलेज में ऐसे मरीज प्रशासन और कर्मचारियों पर बोझ की तरह नजर आते हैं। हैरानी की बात यह है कि उस समय दर्जनों डॉक्टर और स्टाफ मौजूद थे, इसके बावजूद संवेदनहीनता दिखाई गई।

इस गंभीर लापरवाही ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पूरे मामले में सीएमएस प्रशांत निरंजन और मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आम जनता का आरोप है कि बिना तीमारदार के आने वाले मरीजों की कोई सुनवाई नहीं होती और अव्यवस्थित व्यवस्था के चलते मरीजों की हालत और बिगड़ जाती है।

प्रकरण के संबंध में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस अमानवीय लापरवाही पर दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।

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