
काशी की शिव बारात में वृंदावन की लट्ठमार होली, कर्नाटक की हंपी होली का नजारा, झांकियों में दिखेगी अन्य राज्यों की सांस्कृतिक परंपराओं की झलक
वाराणसी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर काशी की पहचान बन चुकी विश्व प्रसिद्ध शिव बरात इस वर्ष पूरी तरह होलियाना रंग और बनारसी अंदाज में निकाली जाएगी। करीब 45 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में इस बार रंग, हास्य, व्यंग्य और लोक संस्कृति का ऐसा समावेश देखने को मिलेगा, जो काशी की गलियों को उल्लास और ठहाकों से भर देगा। 15 फरवरी को महामृत्युंजय महादेव मंदिर, दारानगर से निकलने वाली शिव बरात में बनारसी हुड़दंग के साथ देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झांकियां आकर्षण का केंद्र होंगी।
हर आदमी टेंशन में, चलो थोड़ा गुदगुदाया जाए थीम
इस बार की शिव बरात की विशेष थीम “हर आदमी है टेंशन में, चलो थोड़ा गुदगुदाया जाए” रखी गई है। आयोजन समिति के अनुसार वर्तमान समय में माघ मेला, यूजीसी, मणिकर्णिका घाट सहित विभिन्न मुद्दों के कारण आम जनमानस तनाव से गुजर रहा है। ऐसे माहौल में बनारस की लुप्त होती मस्ती, ठिठोली और अल्हड़पन को फिर से जीवंत करने के उद्देश्य से शिव बरात को होली की मस्ती और बनारसी रंग में ढाला गया है। बाबा भोलेनाथ की बरात में हास्य, लोकगीत, रंग और व्यंग्य के माध्यम से काशी की आत्मा सड़कों पर उतरती दिखाई देगी।
वृंदावन की लट्ठमार होली और कर्नाटक की हंपी होली का नजारा
शिव बरात में वृंदावन की प्रसिद्ध लट्ठमार होली, कर्नाटक की हंपी होली, पंजाब की होला मोहल्ला सहित अन्य राज्यों की सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित झांकियां शामिल होंगी। इससे शिव बरात न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक एकता और लोकभावना का भी प्रतीक बनेगी। शिव बरात से पहले ही काशी में बाबा भोलेनाथ की शादी की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर में चढ़ाए गए बेलपत्र और तिलक युक्त निमंत्रण पत्रों के माध्यम से भोजपुरी भाषा और बनारसी शैली में आम जनता को शिव विवाह का न्योता दिया जा रहा है, जो काशी की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है।
मृत्युंजय महादेव मंदिर से होगी शिव बारात की शुरुआत
शिव बरात की शुरुआत शाम पांच बजे दारानगर स्थित महामृत्युंजय महादेव मंदिर से होगी। यह बरात दारानगर, मैदागिन, बुलानाला, नीचीबाग, आसभैरव, चौक, ज्ञानवापी और गोदौलिया होते हुए दशाश्वमेध स्थित चितरंजन पार्क में संपन्न होगी। लगभग चार किलोमीटर की यह यात्रा करीब सात घंटे में पूरी होगी। मार्ग में जगह-जगह काशीवासी दूल्हा बने बाबा भोलेनाथ का तिलक कर स्वागत करेंगे। इस वर्ष करीब पांच लाख श्रद्धालुओं के शामिल होने का अनुमान है, जिसे देखते हुए प्रशासन ने भी सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं।
उधर, महाशिवरात्रि पर तिलभांडेश्वर महादेव मंदिर से भी भव्य और अलौकिक शिव बरात निकाली जाएगी। यह आयोजन महंत स्वामी शिवानंद गिरि जी महाराज के संरक्षण में संपन्न होगा। दोपहर 12 बजे मंदिर से निकलने वाली शिव बरात विभिन्न मार्गों से भ्रमण करते हुए सायं चार बजे पुनः मंदिर प्रांगण में पहुंचेगी। बरात में महाकाल, ब्रह्मा-विष्णु-महेश, राम दरबार, नवदुर्गा सहित अनेक दिव्य झांकियां, डमरू नाद, ढोल-नगाड़े और शहनाई श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराएंगे। सायं आरती, रात्रि रुद्राभिषेक और अगले दिन महाप्रसाद वितरण के साथ आयोजन संपन्न होगा।