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पूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने की ‘टीचर्स ऑफ बिहार’ की सराहना देशभर में मॉडल के रूप में अपनाने का दिया भरोसा

पूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने की ‘टीचर्स ऑफ बिहार’ की सराहना

देशभर में मॉडल के रूप में अपनाने का दिया भरोसा

पटना। बिहार के शिक्षा विभाग के पूर्व अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने शिक्षकों के नवाचारी और वैचारिक मंच “टीचर्स ऑफ बिहार” की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे शिक्षा क्षेत्र में एक प्रभावशाली प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी (PLC) बताया है। उन्होंने कहा कि टीचर्स ऑफ बिहार ने शिक्षक सशक्तिकरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में जो कार्य किया है, वह न केवल बिहार बल्कि देश के अन्य राज्यों के लिए भी अनुकरणीय मॉडल है।

डॉ. सिद्धार्थ ने विश्वास दिलाया कि जिस तरह से यह समूह शिक्षकों को जोड़कर सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण का निर्माण कर रहा है, उसे राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की पूरी संभावना है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षकों को साझा मंच, वैचारिक स्वतंत्रता और नवाचार के अवसर मिलें, तो सरकारी विद्यालयों की तस्वीर बदली जा सकती है—और टीचर्स ऑफ बिहार इसका सशक्त उदाहरण है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि टीचर्स ऑफ बिहार आज केवल एक संगठन नहीं, बल्कि एक विचार और आंदोलन बन चुका है, जो शिक्षक को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे सीखने-सिखाने की सतत प्रक्रिया से जोड़ता है।

लाखों शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी....
टीचर्स ऑफ बिहार समूह से आज लाखों शिक्षक डिजिटल माध्यमों के ज़रिये जुड़े हुए हैं। ये शिक्षक प्रतिदिन अपनी नवाचारी शिक्षण गतिविधियाँ, कक्षा अनुभव, शिक्षण सामग्री, प्रयोग और सफलता की कहानियाँ साझा करते हैं। इस सतत संवाद और सहयोग का प्रत्यक्ष प्रभाव राज्य के सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के रूप में देखने को मिल रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी शिक्षकों में आत्मविश्वास बढ़ाती है, उन्हें अद्यतन रखती है और बच्चों के सीखने के अनुभव को अधिक प्रभावी बनाती है।

राष्ट्रीय पहचान की ओर अग्रसर....
डॉ. एस. सिद्धार्थ ने कहा कि यदि इसी प्रतिबद्धता और सकारात्मक सोच के साथ टीचर्स ऑफ बिहार आगे बढ़ता रहा, तो आने वाले समय में यह मंच राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक नवाचार का प्रतीक बनेगा। उन्होंने समूह के संयोजकों और सक्रिय शिक्षकों को इस पहल के लिए बधाई देते हुए निरंतर सीखने और साझा करने की संस्कृति को बनाए रखने का आह्वान किया।

शिक्षा जगत में डॉ. सिद्धार्थ के इस वक्तव्य को टीचर्स ऑफ बिहार के लिए एक बड़ी उपलब्धि और प्रेरणास्रोत के रूप में देखा जा रहा है।

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