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भारत में साँप के डसने से हर साल 50 हज़ार लोगों की मौत, ग्रामीण इलाकों में सबसे ज़्यादा खतरा

नई दिल्ली।
भारत में साँप के डसने की घटनाएँ एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनती जा रही हैं। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार देश में हर साल करीब 50 हज़ार लोगों की जान साँप के ज़हर से चली जाती है, जो दुनिया में सबसे अधिक है। इन मौतों का बड़ा हिस्सा ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों से सामने आता है, जहाँ समय पर इलाज और जागरूकता की भारी कमी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक खेतों में काम करने वाले किसान, मजदूर, महिलाएँ और बच्चे सबसे अधिक जोखिम में हैं। बरसात के मौसम में साँपों के बिलों में पानी भरने से वे रिहायशी इलाकों की ओर आ जाते हैं, जिससे डसने की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ जाती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि समय पर एंटी-वेनम इंजेक्शन मिल जाए तो ज़्यादातर मामलों में जान बचाई जा सकती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पतालों की दूरी, झाड़-फूँक पर भरोसा और जानकारी की कमी मौत की बड़ी वजह बन रही है।
सरकार ने साँप के काटने को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता अभियान और इलाज की सुविधाएँ बढ़ाने की बात कही है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर अब भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं।
विशेषज्ञों की अपील है कि
साँप के काटने पर तुरंत अस्पताल जाएँ
झाड़-फूँक या देसी इलाज से बचें
खेतों और घरों के आसपास साफ़-सफाई रखें
बरसात में विशेष सावधानी बरतें

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