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गोल्ड मेडल छात्र का कानूनी अधिकार नहीं है, योग्यता एकेडमिक अथॉरिटी तय करती हैं: मद्रास हाई कोर्ट

मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि गोल्ड मेडल देना किसी छात्र का कानूनी या वैधानिक अधिकार नहीं है, जिसे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका के ज़रिए लागू किया जा सके
जस्टिस डी भरत चक्रवर्ती ने कहा कि एकेडमिक सम्मान के लिए योग्यता के सवाल एकेडमिक अधिकारियों के फैसले पर छोड़ दिए जाने चाहिए।
कोर्ट पुडुचेरी के भरथिदासन गवर्नमेंट कॉलेज फॉर विमेन की B.Com स्टूडेंट वेनिला की दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसने पांडिचेरी यूनिवर्सिटी और कॉलेज को 2015-2018 एकेडमिक सेशन के लिए उसे गोल्ड मेडल देने का निर्देश देने की मांग की थी।

कोर्ट ने कहा, "मैं इस बात पर विचार करता हूं कि गोल्ड मेडल देना एक एकेडमिक स्कीम का हिस्सा है ताकि स्टूडेंट की एकेडमिक काबिलियत को पहचाना जा सके, जिससे मेडल पाने वाले स्टूडेंट और दूसरे स्टूडेंट्स को भी इसे पाने के लिए और मोटिवेशन मिले। इसमें कोई कानूनी अधिकार शामिल नहीं है।"

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