
कन्हैया गुलाटी पर मुकदमों का अड्डा
निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी, धमकी और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
बरेली (महानगर)।
निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की कथित ठगी, पीड़ितों को अभद्रता और जान से मारने की धमकी देने के मामलों में कन्हैया गुलाटी का नाम लगातार विवादों में बना हुआ है। थाना बारादरी में एक और प्राथमिकी दर्ज होने के साथ ही उसके खिलाफ दर्ज मुकदमों की संख्या लगभग 50 तक पहुंच चुकी है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक किसी भी बड़े आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
रुपये मांगने पर धमकी का आरोप
नवाब शेरखान निवासी दीपक गंगवार ने थाना बारादरी में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि उनके 66 वर्षीय पिता सेवानिवृत्त सैनिक हैं। आरोप है कि कन्हैया गुलाटी और उसके सहयोगियों ने सात प्रतिशत मासिक रिटर्न, प्लॉट आवंटन और सुरक्षित निवेश का झांसा देकर 22 लाख रुपये से अधिक की रकम निवेश करा ली।
जब निवेश की गई राशि वापस मांगी गई, तो आरोपियों ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए जान से मारने की धमकी दी।
संगठित नेटवर्क का आरोप
पीड़ित के अनुसार, कन्हैया गुलाटी अकेला नहीं है, बल्कि उसके साथ
प्रमोद सिंह परिहार, नुकता प्रसाद, अनुज कुमार, आदित्य सक्सेना, उसकी पत्नी आंचल सक्सेना, जितेंद्र पटेल, अजीत सहित अन्य लोग शामिल हैं।
आरोप है कि यह पूरा गिरोह संगठित तरीके से निवेशकों को फंसाकर अलग-अलग खातों में पैसा जमा कराता था।
पेंशन और जीवनभर की कमाई भी डूबी
पीड़ित ने बताया कि उनके पिता की पेंशन और जीवनभर की बचत से
आरडीएस/कैप्स एसोसिएट्स के खाते में 4.5 लाख रुपये,
कैनविज इंफ्रा कॉरपोरेशन के खाते में 16.75 लाख रुपये
जमा कराए गए।
नौ महीने बीत जाने के बाद भी एक रुपये का भुगतान नहीं किया गया।
घर जाकर धमकाने का आरोप
रिपोर्ट के अनुसार, जब दीपक गंगवार रुपये मांगने आदित्य सक्सेना के घर पहुंचे, तो वहां सभी आरोपी मौजूद थे। आरोप है कि उन्हें घर के भीतर खींचकर गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। फोन पर भी धमकियां दी गईं और बाद में फोन उठाना बंद कर दिया गया।
“एसपी–एसएसपी भी पैसा नहीं दिला पाएंगे”
पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों ने धमकाते हुए कहा कि
“चाहे एसपी हो, एसएसपी हो या कोई और, तुम्हारा पैसा कोई नहीं दिला पाएगा।”
इस तरह की बातें सुनकर पीड़ित परिवार भय और मानसिक तनाव में है।
800 करोड़ के महाघोटाले की चर्चाएं
लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच कन्हैया गुलाटी पर 800 करोड़ रुपये तक के महाघोटाले की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। निवेशकों का दावा है कि इस नेटवर्क के जाल में सैकड़ों लोग फंस चुके हैं, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई का न होना कई सवाल खड़े करता है।
प्रशासन की भूमिका पर उठते सवाल
लगातार दर्ज हो रहे मुकदमों, करोड़ों की कथित ठगी और अब तक किसी भी बड़ी गिरफ्तारी न होने से निवेशकों के बीच गहरी नाराज़गी और अविश्वास पैदा हो गया है। पीड़ितों और आम लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि मामला केवल एक व्यक्ति या गिरोह तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जिला स्तर के कुछ प्रभावशाली अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण की आशंका भी जताई जा रही है।
निवेशकों का कहना है कि यदि प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण न होता, तो इतने बड़े स्तर पर ठगी का नेटवर्क वर्षों तक सक्रिय नहीं रह पाता और न ही बार-बार मुकदमे दर्ज होने के बावजूद आरोपी खुलेआम घूमते रहते। यही कारण है कि पीड़ितों को अब तक अपनी मेहनत की कमाई वापस मिलने की कोई ठोस राह दिखाई नहीं दे रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है, क्या निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी, और क्या दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर निवेशकों का पैसा वापस दिलाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।
फिलहाल, निवेशकों की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं—क्योंकि यही तय करेगा कि यह मामला सिर्फ फाइलों में दबेगा या फिर वास्तव में न्याय की ओर बढ़ेगा।