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सुनहरी धार, खैरथल मंडी में हर साल सरसों का कारोबार,20 से ज्यादा बड़ी मिल है

*सुनहरी धार,खैरथल मंडी में हर साल सरसों का कारोबार, 20 से ज्यादा बड़ी मिल है*
*मस्टर्ड कैपिटल खैरथल... देश की हर तीसरी रसोई में यहां की मिलों का तेल*

खैरथल / हीरालाल भूरानी
खैरथल का नाम सुनते ही सबसे पहले सरसों तेल की महक का अहसास होता है। सरसों और इसके तेल के कारोबार में खैरथल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूत पहचान है। ब्रांड कोई भी हो, तेल खैरथल की मिलों से ही पहुंच रहा है। पतंजलि, फॉच्यून, धारा, इमामी हो या फिर फ्लिपकार्ट, अमेजन, रिलायंस, विशाल और डी-मार्ट जैसे मेगा स्टोर हर दूसरे बड़े ब्रांड के पीछे खैरथल का सरसों तेल पहुंच रहा है। नया जिला बनने के बाद खैरथल से उम्मीदें और बढ़ गई हैं। कारोबारियों को भरोसा है कि सरकारी सहयोग मिला तो यह शहर सरसों तेल की राजधानी के रूप में और मजबूत पहचान बनाएगा।
खैरथल में सरसों तेल उद्योग की नींव आजादी से पहले ही पड़ चुकी थी। वर्ष 1947 में पंडित हरिप्रसाद शर्मा ने यहां बड़ी तेल मिल स्थापित की। उस दौर में घरेलू कच्ची घाणियों के कारण खैरथल को अनाज मंडी देशभर में मशहूर हो गई। बीते दो दशकों में यह शहर सरसों से जुड़े उत्पादों का राष्ट्रीय हब बन चुका है।
*जानिए... सरसों के तेल का कारोबार कितना बड़ा*
इस बार करीब एक हजार करोड़ रुपए के जिंस खैरथल मंडी में आए, इसमें लगभग 65 फीसदी से अधिक हिस्सा सरसों का ही रहा।
खैरथल में करीब 20 से अधिक बड़ी तेल मिलें संचालित हैं। यहां रोजाना उत्पादन लगभग 300 टन सरसों तेल का है जिसका बाजार मूल्य करीब 3.90 करोड़ रुपए है।
औसतन सरसों तेल का भाव 130 रुपए प्रति लीटर है। इनमें से करीब 200 टन तेल प्रतिदिन देश की बड़ी कंपनियों को सप्लाई किया जाता है। करीब 100 टन तेल अलग-अलग ब्रांड नामों से पैकेजिंग होकर बाजार में जाता है। वहीं कई कंपनियां पैकेजिंग का काम भी खैरथल की मिलों में ही करवा रही हैं।
*अधिकतर ब्रांड में सरसों तेल खैरथल का ही*
खैरथल की तेल मिलों ने अपने उत्पादन का करीब 90 फीसदी हिस्सा बड़ी कंपनियों से टाई-अप कर रखा है। कई नामी कंपनियां यहां से खुला तेल खरीदकर अपने ब्रांड नाम से बाजार में उतार रही हैं। यहां की प्रमुख तेल मिल में विजय इंडस्ट्रीज, सिंघानिया मिल, जय वैष्णो ऑयल मिल, आरआर मिल, मुकेश ऑयल मिल, एसकेएस ऑयल मिल, आनंद कॉटन ऑयल मिल, अन्नपूर्णा ऑयल मिल सहित 70 से अधिक कच्ची घाणियां और स्पेलर कुटीर उद्योग के रूप में सक्रिय हैं। मदर डेयरी, धारा, अडानी फॉर्च्यून, पतंजलि, रिलायंस गुड लाइफ, विशाल मेगा मार्ट, स्पेंसर, सिटी मॉल, किराना वन, फ्लिपकार्ट, उड़ान सहित दर्जनभर बड़े ब्रांड खैरथल से सरसों तेल खरीद रहे हैं।
1947 में पंडित हरिप्रसाद शर्मा ने बड़ी तेल मिल स्थापित की।
90 फीसदी खैरथल की तेल मिलों ने कंपनियों से टाई-अप कर रखा।
*सरकारी मांग भी बढ़ी, कई राज्यों को सप्लाई*
अब केवल निजी कंपनियां ही नहीं, बल्कि हरियाणा, असम सहित कई राज्य सरकारें भी अपनी जरूरतों के लिए खैरथल से सरसों तेल खरीद रही हैं। बढ़ती मांग के चलते अब अलवर-भरतपुर के साथ-साथ पावटा, टोंक, निवाई, सुमेरपुर और झुंझुनूं, कुंड, महेंद्रगढ़ तक से सरसों की आवक खैरथल मंडी में हो रही है। तेल कारोबारियों ने खैरथल को सरसों तेल उद्योग की ऊंचाइयों तक पहुंचाया है, लेकिन अब उनकी चिंता सरकारी नीतियों और मल्टीनेशनल कंपनियों को लेकर है। तेल कारोबारी नीलम गुप्ता का कहना है कि कोरोना काल में लगाया गया एम कृषि कल्याण सेस आज तक जारी है, जिससे कच्चा माल महंगा हो गया है। यदि सरकार यह टैक्स हटाए तो तेल मिलों को बड़ा लाभ मिलेगा। महेन्द्र डाटा बताते हैं कि स्थानीय तेल मिलों को अपेक्षित सरकारी सहयोग नहीं मिल पा रहा। यदि सरकार नीति बनाकर छोटी मिलों को हिस्सेदारी दे, तो उद्योग और मजबूत हो सकता है।

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