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किसी भी व्यक्ति या संस्था को अपने निजी परिसर में धार्मिक प्रार्थना या आराधना करने के लिए किसी प्रकार की सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं। हाईकोर्ट।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने Writ-C No. 1097 of 2026 (Maranatha Full Gospel Ministries बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) में दिनांक 27 जनवरी 2026 को यह स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को अपने निजी परिसर में धार्मिक प्रार्थना या आराधना करने के लिए किसी प्रकार की सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। यह अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के अंतर्गत प्रदत्त मौलिक अधिकार है।
न्यायालय के समक्ष यह स्पष्ट किया गया कि याचिकाकर्ता द्वारा कोई भी धार्मिक जुलूस या कार्यक्रम सार्वजनिक सड़क, सार्वजनिक भूमि या सरकारी संपत्ति पर नहीं किया जाएगा और सभी प्रार्थना गतिविधियाँ केवल निजी परिसर तक सीमित रहेंगी।
न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि कभी सार्वजनिक स्थान पर कार्यक्रम करना आवश्यक हो, तो कानून के अनुसार पुलिस को पूर्व सूचना देना एवं आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही, याचिकाकर्ता की जान, संपत्ति और अधिकारों की सुरक्षा करना राज्य का कर्तव्य है।
इन निर्देशों के साथ न्यायालय ने याचिका को निस्तारित (Disposed Off) कर दिया।
आइमा मीडिया संवाददाता प्रेम मसीह

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