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विद्यार्थियों को संरक्षित खेती पाली हाउस टपक सिंचाई एवं मल्चिंग का दिया गया तकनीकी प्रशिक्षण

🔳विद्यार्थियों को संरक्षित खेती पाली हाउस टपक सिंचाई एवं मल्चिंग का दिया गया तकनीकी प्रशिक्षण

🔳कटनी – विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत कृषि विषय का अध्ययन कर रहे शासकीय आरके गौतम उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मुरवारी विकासखंड ढीमरखेड़ा के विद्यार्थियों को प्राचार्य संघ रत्न भेलावे के मार्गदर्शन में जैविक कृषि विशेषज्ञ रामसुख दुबे द्वारा जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण में विद्यार्थियों को संरक्षित खेती के अंतर्गत ऐसी फसल उत्पादन तकनीक जिसके वातावरण को सूक्ष्म आंशिक पूर्ण रूप से नियंत्रित कर अधिक एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त किया जाता है की जानकारी दी गई। बताया गया कि संरक्षित खेती के मुख्य लाभ सीमित क्षेत्र से अधिक उत्पादकता भूमि एवं जल का बेहतर उपयोग नियंत्रित वातावरण में वर्ष पर्यंत उत्पादन अधिकतम लाभ हेतु बेमौसमी फसल उत्पादन संभव खुले खेतों की अपेक्षा गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्रतिकूल मौसम से सुरक्षा की एवं रोग से सुरक्षा तथा जैविक खेती के मजबूत आधार की जानकारी दी गई। पाली हाउस के अंदर नियंत्रित वातावरण में पौधों को उगाया जाता है तथा उत्पादन को प्रभावित करने वाले कारक सूर्य का प्रकाश तापमान आर्द्रता आदि विभिन्न कारकों पर नियंत्रण किया जाता है। सामान्य खेत में सब्जियों का सफल एवं अधिक उत्पादन लेना संभव नहीं होता है जबकि पाली हाउस में सफलतापूर्वक लिया जा सकता है। कुछ सब्जियों को ग्रीन हाउस के अंदर साल भर उगाया जा सकता है। सब्जियां उत्तम गुणवत्ता वाली होती है। टपक सिंचाई पद्धति को ड्रिप सिंचाई भी कहते हैं। जिससे पानी बूंद-बूंद के रूप में पौधों की जड़ों में उपलब्ध होता है जल के साथ-साथ उर्वरक सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाई जा सकते हैं इस विधि में पानी की बचत 80 से 90 प्रतिशत खरपतवार नींदा नियंत्रण नमी का संरक्षण तथा पानी देने के लिए नालियां बनाने की आवश्यकता नहीं होती जिससे श्रम की बचत होती है।

प्रशिक्षण में बताया गया कि फसल की वृद्धि के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता युक्त उत्पादन प्राप्त होता है। प्लास्टिक मल्चिंग का उपयोग जिसे आच्छादन कहते हैं। नमी के संरक्षण के लिए खरपतवार को उगने से रोकने के लिए पानी की बचत के लिए मृदा के तापमान को नियंत्रित करने के लिए पौधे के वृद्धि एवं विकास हेतु अनुकूल वातावरण प्रदान करने के लिए जड़ के बेहतर विकास के लिए भूमि को कठोर होने से बचने के लिए तेजी से बीज अंकुरण के लिए उत्पादन बढ़ाने के लिए उत्पाद गुणवत्ता में सुधार के लिए शुष्क भूमि में खेती को प्रभावशाली बनाने के लिए कम लागत तकनीकी जीरो बजट फार्मिंग तथा अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता है प्रशिक्षण को संपन्न कराने में व्यावसायिक शिक्षकमहेंद्र दोहरे ने सहयोग प्रदान किया।
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