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सच्चा मानव धर्म यही है—भेदभाव मिटाओ, समानता लाओ-गुरु रविदास जी

चंडीगढ़ -01-02-2026 आरके विक्रमा शर्मा अनिल शारदा पंकज राजपूत प्रस्तुति---
आज संतश्री गुरु रविदास जी महाराज के प्रकट दिवस पर सभी को हार्दिक बधाई!इस पावन अवसर पर रामदरबार फेज-2, चंडीगढ़ में श्री गुरु रविदास महाराज का जन्मदिन धूमधाम से मनाया गया। मुझे भी वहां शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। श्री गुरु रविदास कमेटी ने हर वर्ष की तरह इस बार भी शानदार आयोजन किया। 15 दिनों से उनकी शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार निरंतर चल रहा था कमेटी का बहुत बहुत धन्यवाद जिन्होंने यह आयोजन किया ।गुरु रविदास जी महाराज ने दलित होने के कारण भारी अत्याचार और जातिगत भेदभाव झेला, फिर भी उन्होंने कर्म को प्रधानता दी। उन्होंने जाति-पाति का विरोध किया और अपनी लगन-भक्ति से सत्य और चमत्कार रचे। उनका प्रसिद्ध कथन है: "मन चंगा तो कठौती में गंगा"।ब्राह्मणों ने उस समय के4 राजा से शिकायत करी कहा था कि जब वे गंगा स्नान करते हैं, तो रविदास जी की चमड़े वाली कठौती धोते है इससे गंगा नाराज हो जाती है। रवि दास जी कहते थे मन चंगा होना चाहिए इस कुछ नहीं होता तो आखिर में फैसला हुआ—गंगा में सभी ब्राह्मण अपने अपने ठाकुरों लाये डुबोएं, ओर रविदास अपना चमड़े घिसने वाला पत्थर लाये जो तर जाए, वही पता चल जाएगा गंगा किससे नाराज होती है सब बोले पत्थर तो तैरता नहीं तो रविदास पहले अपना पत्थर डुबाए लेकिन रविदास जी का पत्थर तैर गया!ओर ब्राह्मणों का डूब गया तब से यह प्रथा चली कि पवित्रता मन की होती है, भेदभाव से ऊपर उठकर कर्म करो।
रविदास महाराज जी चमार जाति से होते हुए भी समाज को नई दिशा दी। सोचने वाली बात यह है कि 1388 में जन्मे रविदास जी के इतने वर्षों के बाद भी आज 2026 तक दलितों पर अत्याचार जारी हैं।आज जहां गरीब और दलित बच्चे स्कूल जाते हैं, वहां शिक्षक ही नहीं होते। सेंट्रलाइज्ड एडमिशन नहीं मिलती। जो जिनको मिल भी जाती है, वहां शिक्षक उपलब्ध नहीं—यह प्रशासन की सोची-समझी चाल है ताकि वे आगे न बढ़ें, न वकील बनें, न डॉक्टर, न इंजीनियर।हाल ही UGC गाइडलाइन में दलित-दिव्यांगों के अत्याचार रोकने के लिए कमेटियां बनाने का प्रावधान था, जिसमें सदस्य दलित समुदाय से हों। लेकिन उच्च जातियों ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर रोक लगवा दी ।हमें अपने बच्चों का भविष्य संवारना है। स्कूलों में शिक्षक हैं या नहीं, यह जांचना होगा। अपने अधिकारों के लिए लड़ें, अन्यथा कोई फायदा नहीं। हमारे बच्चों के सुनहरे भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो देखना होगा ओर अधिकारों की लड़ाई लड़नी होगी हम किसी के विरोध में नहीं परंतु अपने अधिकारों के लिये जागृत रहना है
सच्चा मानव धर्म यही है—भेदभाव मिटाओ, समानता लाओ!

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